भले ही छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को मध्यप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का बयान पसंद न आया हो और उन्होंने तोमर पर मानहानि का केस ठोकने की धमकी भी दे डाली हो, लेकिन 25 मई को हुई 'नक्सली वारदात' से कुछ सवाल ऐसे उठ रहे हैं जिससे जोगी के राजनीतिक विरोधी उन्हें कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
1# हमले में मारे गए जोगी विरोधी
यह बहुत बड़ा इत्तेफाक है कि हमले में निशाना बनाए गए ज्यादातर लोग जोगी विरोधी थे। चाहे वह महेंद्र कर्मा हों, नंद कुमार पटेल हों, उदय मुदलियार हों या फिर वीसी शुक्ला, इन सबसे पार्टी में जोगी की कटुता जग जाहिर है।
2# जोगी समर्थक की ही बची जान
यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर इस खतरनाक हमले में सिर्फ कवासी लकमा को नक्सलियों ने क्यों जाने दिया। लकमा बस्तर से अकेले कांग्रेसी बिधायक हैं और वह भी जोगी समर्थक माने जाते हैं।
3# कहां से मिली लकमा को बाइक
जिन परिस्थितियों में कवासी लकमा घटनास्थल से बच निकलने में कामयाब हुए, वह भी उन्हें शक के घेरे में लाती हैं। सूत्रों का कहना है कि जिस जगह नक्सलियों ने कांग्रेस के काफिले को घेरकर धावा बोला, वहां से लकमा को बाइक मिलना और उस इलाके से भागकर सुरक्षित वापस पहुंचना काफी मुश्किल था।
4# पटेल तो थे सलवा जुड़ूम विरोधी
बीबीसी को लिखे एक पत्र में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) ने कहा कि उनका मुख्य निशाना सलवा जुड़ूम आंदोलन के नेता महेंद्र कर्मा थे। इसके बावजूद, उन्होंने नंद कुमार पटेल की हत्या की जबकि पटेल मुखर होकर सलवा जुड़ूम का विरोध कर रहे थे।