फाफामऊ में हुए बवाल के पीछे लोगों में पक्षपात का गुस्सा रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर तो सड़क से हटकर और छोटे हैं जबकि दूसरे धर्मस्थल सरकारी जमीन पर होने के बावजूद एडीए ने उसकी अनदेखी कर दी।
पुलिस-प्रशासन को भी अब लग रहा है कि यह मामला तूल पकड़ सकता है। शायद यही वजह है कि रात में ही जेसीबी मंगाकर तोड़फोड़ वाली जगहों से मंदिर के निशान भी हटा दिए। उधर, हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने कह दिया है कि एडीए और प्रशासन ने ज्यादती की है। तोडे़ गए मंदिरों को उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा।
पहले भी हुआ था मंदिर तोड़ने का विरोध
फाफामऊ में अतिक्रमण हटाना पूर्व नियोजित था लेकिन हनुमान जी के मंदिरों को तोड़ने का विरोध पहले भी हो चुका था। एडीए को भी इस विरोध का अंदाजा था इसीलिए पुलिस बल भी साथ मुस्तैद था। मगर मंदिरों को तोड़ने के साथ ही एडीए दस्ते की कारगुजारी लोगों को अखर गई। नतीजा तीन घंटे तक हुए भारी बवाल के रूप में सामने है।
अब विहिप के अखिल भारतीय सामाजिक समरसता अभियान के प्रांत मंत्री पवन श्रीवास्तव तथा विहिप नेता शिवम द्विवेदी समेत स्थानीय लोगों ने ऐलान कर दिया है कि मंगलवार को तोड़े गए मंदिरों को उसी स्थान पर फिर से तैयार किया जाएगा। ऐसे में पुलिस-प्रशासन के सामने स्थिति संभालने की चुनौती है। इसके लिए शांतिपुरम में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती का फैसला किया गया है।
दूर-दूर तक सड़क पर कांच और पत्थर
शांतिपुरम में फायरिंग और लाठीचार्ज के बाद भागी भीड़ ने लखनऊ हाइवे पर पथराव और आगजनी की जिससे सड़क पर दूर-दूर तक गाड़ियों के टूटे कांच और ईंट-पत्थर बिखरे दिखे। इलाके में तनाव के बीच दहशत भरा माहौल रहा।
लोग अब इस मामले के भड़कने को लेकर आशंकित हैं। देर रात तक इलाके में पुलिस और आरएएफ की गाड़ियां ही सायरन बजाते घूमती रहीं जिससे लोग घरों में सहमे दुबके रहे।
उत्पात में घायल हुए आरएएफ के जवान
पथराव और फायरिंग में आरएएफ के जवान जख्मी हुए तो स्थानीय लोग भी घायल हुए। पथराव में रैपिड एक्शन फोर्स के उपनिरीक्षक उमाशंकर सिंह, सहायक उपनिरीक्षक अशोक राय, हवलदार चंद्रपाल, सिपाही रंजीत कुमार को चोट पहुंची।
पार्षद ने भी कहा, यह सरासर अन्याय
इस मामले में फाफामऊ की पार्षद रिंकी यादव ने भी बयान जारी किया है कि शांतिपुरम की घटना एडीए तथा पुलिस-प्रशासन की ओर से सरासर अन्याय का नतीजा है। एडीए को मंदिर पर जेसीबी चलाने से पहले सरकारी जमीन पर बने दूसरे धर्मस्थलों को भी हटाना चाहिए।