आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली के दाम अब 24 घंटे एक समान नहीं रहेंगे।
व्यस्त समय (पीक आवर्स) में बिजली महंगी और बाकी समय में सस्ती मिलेगी। केंद्र सरकार इस योजना पर अमल करने के लिए ‘पीक आवर्स पॉलिसी’ तैयार कर रही है।
बतौर केंद्रीय विद्युत राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अपने 300 दिन के कामकाज का ब्यौरा पेश करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि सभी को जल्द जरूरतभर बिजली मिले।
सिंधिया ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में रिकॉर्ड 777 बिलियन यूनिट बिजली पैदा की गई। इस अवधि में बिजली उत्पादन क्षमता में 20622 मेगावाट का इजाफा हुआ।
लंबे समय बाद मीडिया से रूबरू हुए सिंधिया ने कहा कि ‘पीक आवर्स पॉलिसी’ का उद्देश्य ग्रिड में दिन भर बिजली की समान मांग करना है। पीक आवर्स में दाम ज्यादा होने पर लोग बिजली का इस्तेमाल सोच समझ कर करेंगे।
इससे ग्रिड पर सुबह और शाम के वक्त बिजली की बेतहाशा मांग बढ़ने वाले दबाव को कम किया जा सकेगा। अभी देश में बिजली की औसतन 4.5 फीसदी की कमी है।
सिंधिया ने माना कि 2004 में सत्ता में आने पर यूपीए सरकार ने 2012 तक सभी घरों में बिजली उपलब्ध कराने के लिए ‘पॉवर टू ऑल’ का जो वादा किया था, वह पूरा नहीं हो पाया। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहरा दिया।
उन्होंने कहा कि सभी को बिजली मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत राज्यों की मदद करती है, योजना पर राज्यों को ही अमल करना है।
सिंधिया ने कहा कि बिजली उपलब्ध कराने के लिए राज्यों को ही ज्यादा बिजली पैदा करनी होगी, केंद्र तो सिर्फ मदद ही कर सकता है। बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए राज्यों को और काम करना होगा।
सिंधिया से जब पावर फाइनेंस कारपोरेशन (पीएफसी) की उस रेटिंग रिपोर्ट का जिक्र किया गया, जिसमें नरेंद्र मोदी के गुजरात की तीनों वितरण कंपनियों को सबसे अग्रिम स्थान मिला है, तो मंत्री ने कहा कि उन्हें गुजरात की वितरण कंपनियों के कामकाज की सराहना करने से कोई ऐतराज नहीं है।
हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।