भ्रष्टाचार के मामलों की लंबी फेहरिस्त के बाद अब रेल घूसकांड के भंवर में घिरी यूपीए सरकार ने नैतिकता एक बार फिर ताक पर रख दी।
रेलवे में प्रमोशन के लिए करोड़ों की घूसखोरी में रेल मंत्री के भांजे की गिरफ्तारी के बाद शनिवार को कांग्रेस ने पवन बंसल के इस्तीफे से दो टूक इंकार कर दिया।
तो विपक्ष की इस मांग को दरकिनार करते हुए सरकार भी पूरी तरह बंसल के साथ दिखी। इस बीच मामले में गिरफ्तार रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है।
2 नहीं पूरे 12 करोड़ की हुई थी डील
घूसकांड को लेकर भाजपा समेत विपक्षी दलों ने रेल मंत्री पवन बंसल के इस्तीफे की मांग तेज करते हुए यूपीए सरकार पर हमला तेज कर दिया है।
भाजपा ने यूपीए सरकार को दलालों, सौदागरों की ऐसी सरकार तक करार दे दिया, जहां हर फैसला बिकता है। मगर बंसल की विदाई के बाद सीधा सरकार की गर्दन पर तलवार लटकने के डर से कांग्रेस और यूपीए सरकार बंसल की कुर्सी को मजबूरी में बचाने की कोशिश में जुट गई है।
प्रधानमंत्री आवास पर करीब दो घंटे तक चली कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की मौजूदगी में इसी दिशा में पार्टी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने आगे बढ़ने का फैसला लिया है।
हालांकि सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक रविवार को भी होगी। ऐसे में सोमवार को संसद की बैठक से पहले रविवार को बंसल पर कोई अहम फैसला लिया जा सकता है।
शनिवार को बैठक में बंसल को भी बुलाया गया था। शीर्ष नेताओं ने बंसल से जवाब तलब किया। वहीं बंसल ने इस मामले में खुद की भूमिका को लेकर इंकार किया। सूत्रों के मुताबिक पीएम और सोनिया ने अलग से बंसल से बातचीत कर स्पष्टीकरण मांगा।
बताया जाता है कि बंसल ने बचाव में कहा कि प्रमोशन या नियुक्ति को लेकर भांजे विजय सिंगला से उनकी कोई बात नहीं हुई है।
बल्कि उन्होंने यहां तक दावा किया कि अपने भांजे से पिछले कुछ समय से बात भी नहीं हुई है। समझा जाता है कि बंसल के पुराने गैरविवादास्पद ट्रैक रिकार्ड और उनके दावों के साथ-साथ अपनी सियासत बचाने के लिए कांग्रेस हाईकमान फिलहाल रेलमंत्री के साथ है।
बंसल ने इससे पहले प्रधानमंत्री से मुलाकात कर नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की पेशकश की। लगभग 40 मिनट की बातचीत में बंसल ने इस मामले में खुद के शामिल नहीं होने को लेकर सफाई भी दी। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की।
बल्कि इससे पहले उन्होंने एक बयान के जरिए खुद को इस घटना से अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि सिंगला करीबी रिश्तेदार हैं लेकिन वह या मेरे अन्य संबंधी मेरे सरकारी कामकाज में कोई दखल नहीं देते हैं और न ही वे ऐसा कर सकते हैं। न ही वे मेरे फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। मेरे परिवार और सिंगला के बीच कोई कारोबारी संबंध भी नहीं हैं।
हालांकि रेल मंत्री की सफाई को खारिज करते हुए विपक्ष ने उन्हें तुरंत हटाने की मांग की है। वहीं, बंसल के बचाव में उतरी कांग्रेस ने विपक्ष पर ही हमला बोल दिया। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने भाजपा पर यह कहते हुए पलटवार किया कि कुछ लोगों को इस्तीफा मांगने का रोग लग गया है।
पार्टी के इस बयान से रेल मंत्री को फौरी राहत तो मिली है। मगर रेल मंत्री की कुर्सी पर खतरे के बादल अभी छटे नहीं हैं। माना जा रहा है कि दबाव बढ़ने पर सरकार को कुछ कदम कदम उठाना पड़ सकता है।