भाजपा में मंगलवार की सुबह उठा तूफान रात होते-होते शांत हो गया। पार्टी के राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी द्वारा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सीधे भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का इस्तीफा मांग लेने के बाद दिन भर पार्टी इस मुद्दे पर बंटी नजर आई। परंतु देर रात भाजपा कोर कमेटी की बैठक में पार्टी ने तमाम संकटों से जूझ रहे अपने अध्यक्ष को क्लीन चिट दे दी।
वैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बैठक से दूर रहे। इससे साफ संदेश गया कि भले ही गडकरी को ‘दीवाली गिफ्ट’ के रूप में फिलहाल अभयदान दिया गया हो, लेकिन जिस तरह से अंदर-अंदर घमासान जारी है, धमाका कभी भी हो सकता है।
दिन भर की अनेक बैठकों के बाद अंत में देर रात हुई विस्तारित कोर कमेटी की बैठक में संघ के आर्थिक विचारक व प्रसिद्ध चार्टेड अकाउंटेंट एस गुरुमूर्ति ने गडकरी के पूर्ति समूह (कंपनियों) को लेकर लगे आरोपों का दस्तावेजों के साथ विस्तार से जवाब दिया।
लगभग तीन घंटे चली इस बैठक के बाद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली की ओर से गडकरी के पक्ष में एक संयुक्त बयान जारी किया गया। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गुरुमर्ति के प्रेजेंटेशन से साफ हो गया है कि गडकरी पर लगे सभी आरोप गलत हैं और संबंधित 18 कंपनियों में गडकरी की वैधानिक व कानूनी तौर पर कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि गडकरी ने कानूनी और नैतिक रूप से कुछ गलत नहीं किया है। प्रसाद ने जेठमलानी की मांग को अनसुना कर कार्यकर्ताओं को ऐसे बयान देने से बचने की सलाह दी है जिनसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता हो। इस बैठक में आडवाणी शामिल नहीं हुए। पार्टी की दलील है कि गुरुमूर्ति उन्हें पहले ही जानकारी दे चुके थे, हालांकि सूत्रों का कहना है कि आडवाणी गडकरी के खिलाफ हैं। गडकरी यह कह कह बैठक से दूर रहे कि इसमें उन पर चर्चा हो रही है।
बहरहाल, इससे पहले गडकरी के इस्तीफे मांग पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा दे चुके महेश जेठमलानी के बाद मंगलवार सुबह उनके पिता व पार्टी सांसद रामजेठमलानी भी मैदान में कूद पड़े। जेठमलानी ने गडकरी के इस्तीफे की मांग कर मामला गरमा दिया। जेठमलानी के तीखे तेवरों के चलते भाजपा में गडकरी विरोधी खेमा भी सक्रिय हो गया। इससे गुरुमूर्ति के रास्ते आरएसएस को बीच बचाव में उतरा पड़ा।
जेठमलानी ने यह भी दावा किया था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा भी गडकरी को हटाने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि वे इस मांग को लेकर तीन नेताओं की तरफ से गडकरी व लालकृष्ण आडवाणी को पत्र लिख चुके हैं और उनके संपर्क में भी है। जेठमलानी के कहा कि गडकरी को दोबारा भाजपा की कमान सौंपने से आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान हो सकता है।