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सरकार ने खुद किया संसद में हंगामे का इंतजाम!

Wed, 04 Dec 2013 12:42 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में हंगामा बरपना तय है। विवादित विधेयक पेश करने की इच्छा जताकर हंगामे का इंतजाम खुद सरकार ने किया है तो विपक्ष पहले से ही सरकार के खिलाफ भरा बैठा है।
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पूरे सत्र में बमुश्किल आठ कामकाजी बैठकों के लिए सरकार ने 38 विधेयकों का जखीरा सजा रखा है। इसके अलावा महंगाई, सांप्रदायिक हिंसा, सीबीआई दुरुपयोग जैसे लगभग दो दर्जन मुद्दों पर चर्चा के लिए भी हामी भरी है।

विधेयकों की सूची में महिला आरक्षण, अलग तेलंगाना, सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम, इंश्योरेंस और सूचना का अधिकार के दायरे से दलों को बाहर रखने संबंधी संशोधन विधेयक भी हैं, जिस पर आम सहमति बनना तो दूर विवाद पहले से और बढ़ गया है।
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इसके अलावा सीबीआई के दुरुपयोग मामले में सरकार और भाजपा तो मुजफ्फरनगर में बीते दिनों हुए सांप्रदायिक हिंसा मामले में सपा और भाजपा ने अभी से अपनी तलवार म्यान से निकाल ली है।

वैसे भी राजनीतिक महत्व की दृष्टि से लोकसभा चुनाव से पहले का यह अंतिम सत्र होने के कारण सरकार और विपक्ष ने चर्चा में आने के लिए अपने अपने मुद्दों का हथियार पहले से तैयार कर रखा है।

बेहद सीमित अवधि वाले इस सत्र में महज 12 बैठकें होंगी। इनमें से संसद के दोनों सदनों का पहला दिन सपा के मोहन सिंह तो भाजपा के दिलीप सिंह जूदेव को श्रद्धांजलि देने में बीतेगा तो इसके अगला दिन हमेशा की तरह बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद की भेंट चढ़ेगा।

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बाकी बचे दस दिनों में दो दिन शुक्रवार होने के कारण सरकारी कामकाज नहीं होगा। ऐसे में मुद्दों और विधेयकों की भरमार के बीच सत्र का क्या हश्र होगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

वैसे भी सरकार ने विवादित सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम, अलग तेलंगाना राज्य, महिला आरक्षण जैसे विधेयक के प्रति प्रतिबद्धता जताकर हंगामे का इंतजाम कर दिया है। उधर वाम दल इंश्योरेंस विधेयक पर किसी की सुनने को तैयार नहीं है तो भाजपा महंगाई, सीबीआई के दुरुपयोग, 2जी पर जेपीसी की रिपोर्ट पर हर हाल में चर्चा करा लेना चाहती है।

हंगामे के आसार के बीच लोकसभा अध्यक्ष और उससे पहले संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ की बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में लगभग सभी विपक्षी दलों ने सत्र का समय बढ़ाने की मांग की है। मगर सरकार विपक्ष की मांग से सहमत नहीं दिख रही।

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उसकी योजना किसी भी तरह से अपने वादों से जुड़े विधेयकों को सदन में रखने की है, जिससे इसके पारित न होने का आरोप विपक्ष पर लगाया जा सके। इस कड़ी में सांप्रदायिक हिंसा और महिला आरक्षण विधेयक है। सरकार इन विधेयकों को पेश कर महज राजनीतिक संदेश देना चाहती है।

गूंजेगे प्याज, आलू के दाम
पांच राज्यों की चुनावी जंग के बाद अब बेलगाम महंगाई संसद को भी गरमाने जा रही है। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन से प्याज, आलू व टमाटर समेत खाद्य सामग्री की आसमान छूती कीमतों को लेकर यूपीए सरकार से सवाल पूछे जाएंगे।

भाजपा व लेफ्ट समेत विपक्षी दलों ने महंगाई पर सरकार से जवाब तलब करने के लिए अभी से मैदान में ताल ठोक दी है। लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार की बुलाई सर्वदलीय बैठक में इन दलों ने सरकार से दो टूक कह दिया कि सत्र के दौरान वे सबसे पहले महंगाई पर चर्चा चाहते हैं।

'पेश करेंगे महंगाई पर कार्य स्थगन प्रस्ताव'
विपक्षी दलों के तेवरों से शीतकालीन सत्र के हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं। सत्र के पहले ही दिन दोनों सदनों में भाजपा व लेफ्ट से महंगाई पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश होने का ऐलान हो चुका है। सत्र पर हंगामे के मंडराते बादलों के बीच प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार सुनिश्चित करेगी कि शीतकालीन सत्र सुचारु रूप से चले।

उन्होंने कहा कि सत्र छोटा है, इसलिए इस समय का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करने की कोशिश की जाएगी। दूसरी तरफ  लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि भाजपा सबसे पहले महंगाई पर सरकार से जवाब मांगेगी। भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता ने भी कहा कि वे पहले ही दिन महंगाई पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश करेंगे।
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