विदेश में जमा काले धन पर लगाम कसने के लिए सरकार को सोमवार को बडी सफलता हाथ लगी है। लोकसभा ने विदेशों में जमा काले धन पर अंकुश लगाने के लिए अहम माने जा रहे अघोषित विदेशी आय और संपत्ति (कर अधिरोपण) विधेयक, 2015 को पारित कर दिया है।
जिसमें विदेशों में अवैध काला धन रखने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करते हुए 10 साल तक की कड़ी सजा और जुर्माना एवं 120 प्रतिशत तक कर वसूलने का प्रावधान है।
काले धन से संबंधित इस अहम विधेयक को वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सोमवार को लोकसभा में चर्चा के लिए पेश करते हुए सांसदों से इस बिल पर विचार करने को कहा था। काले धन के खिलाफ लड़ाई में अहम माने जा रहे इस बिल पर जेटली ने समूचे विपक्षी दलों का सहयोग सहयोग मांगा। हालांकि विपक्ष इस विधेयक को स्थाई समिति में भेजने की मांग कर रहा था।
विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए जेटली ने कहा कि इस कानून को लागू करने में देरी से अज्ञात स्थानों पर विदेशों में धन जमा करने वालों को अपनी दौलत को स्थानांतरित करने का मौका मिल जायेगा।
विदेशों में गैरकानूनी धन रखने पर 10 साल की सजा
उन्होंने कहा कि जो लोग बेदाग निकलना चाहते हैं उनके लिए अघोषित संपत्ति के संबंध में बिल में दो हिस्से सुझाए गए हैं। पहला कि संपत्ति की घोषणा करें और फिर 30 प्रतिशत कर एवं 30 प्रतिशत जुर्माना भरें।
उन्होंने कहा कि संपत्ति की घोषणा करने वालों को एक रास्ता प्रदान करने की सीमा समाप्त होने के बाद अगर कोई व्यक्ति विदेशों में अघोषित संपत्ति के साथ पकड़ा जाता है तब उसे 30 प्रतिशत कर के साथ 90 प्रतिशत जुर्माना और आपराधिक अभियोग का सामना करना पड़ेगा।
चुनाव में काला धन वापस लाने के वायदे से पलटी मारने का आरोप झेल रही मोदी सरकार के लिए यह विधेयक बेहद राहत प्रदान करने वाला है।
अपना पहला साल पूरा करने जा रही मोदी सरकार ने विधेयक के जरिये यह मंशा स्पष्ट कर दी है कि काला धन रखने वालों तथा इससे लाभ लेने वालों पर तो कार्रवाई होगी ही। यदि बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों को अवैध संपत्ति जमा रखने का दोषी पाया जाता है, तो उनपर भी कार्रवाई हो सकती है।
एक लाख से ऊपर के लेनदेन पर पैन नंबर अनिवार्य
इस विधेयक के कानून में तब्दील होने के बाद विदेशों में जमा अघोषित रकम पर 30 फीसदी टैक्स और तीन गुना जुर्माने और तीन से लेकर दस साल तक की सजा का प्रावधान है।
जबकि एक तय समय तक 30 फीसदी टैक्स और इतना ही जुर्माना देकर ये रकम वापस लाई जा सकती है। काला धन रखने वालों पर नकेल कसने के प्रयास में एक लाख रुपए से अधिक के लेन-देन में पैन नंबर बताना अनिवार्य कर दिया गया है।
नया कानून बनने के बाद कालाधन रखने अथवा उसे पैदा करने वाले अपराधी ही नहीं बल्कि इस मामले में मध्यस्थ या प्रोत्साहन देने वाले तथा लाभार्थी को भी कार्रवाई का सामना करना होगा।
विपक्ष को बिल के कुछ हिस्सों पर आपत्ति
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भारत व अन्य देशों में वैश्विक बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख संस्था एचएसबीसी पर लोगों का कालाधन रखने में मदद करने का आरोप लग रहा है। सरकार का कहना है कि कानून का मकसद भय पैदा करना नहीं है।
हम उम्मीद करते हैं कि हमारे बैंक व वित्तीय संस्थान अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझते हैं लेकिन यदि यह पाया जाता है कि इन्होंने काला धन मामले में किसी तरह की मदद की है तो निश्चित रूप से कानून के प्रावधान उन पर भी लागू होंगे।
कांग्रेस के शशि थरुर ने बिल के कुछ प्रावधानों में संशोधन की मांग जरूर की मगर सरकार ने उसे ठुकरा दिया। हालांकि कांग्रेस ने इसके बावजूद बिल का विरोध नहीं किया।