महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा रविवार को होगी, लेकिन रुझानों से उत्साहित भाजपा नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए खींचतान शुरू हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे ने मुख्यंमत्री पद पर अपना दावा ठोंक दिया है, जबकि कई अन्य नेता दबी जुबान में मुख्यमंत्री पद पर अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
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पंकजा मुंडे ने शुक्रवार को एक साक्षात्कार में कहा कि वे महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं और वह ये जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार भी हैं। गौरतलब है कि पंकजा मुंडे के पिता गोपीनाथ मुंडे का चंद महीने पहले दिल्ली में सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था।
लोकसभा चुनावों और पिछले विधानसभा चुनावों में मुंडे ही महाराष्ट्र में भाजपा का चेहरा थे। माना जाता है कि मुंडे जीवित होते तो भाजपा उन्हें ही मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सामने रखती। महाराष्ट्र में भाजपा की संभावित जीत के मद्देनजर भी मुंडे समर्थक और भाजपा के कई नेता पंकजा मुंडे को मुख्यमंत्री के रूप पेश कर रहे हैं।
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पंकजा का दावा, बस वो ही हैं मास लीडर
पंकजा मुंडे ने अपनी दावेदारी ठोंककर महाराष्ट्र भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर होने वाली खींचतान का संकेत भी दे दिया है।
पंकजा ने अपनी दावेदारी के समर्थन में शुक्रवार को कहा कि पार्टी में मात्र वही मास लीडर यानी आम लोगों की नेता हैं, जबकि शेष मेट्रो लीडर यानी शहरी क्षेत्रों के नेता हैं। पंकजा के अलावा राज्य भाजपा इकाई के अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस, एकनाथ खड़से, विनोद तावड़े और सुधीर मुनगंटीवार भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं।
हालांकि पंकजा मानती हैं कि वे सभी दावेदारों से बेहतर हैं। जब उनसे पूछा गया कि राजनीति में वे कम अनुभवी हैं, ये बात उनकी दावेदारी के आड़े नहीं आएगी।
पंकजा ने जवाब दिया, 'मुख्यमंत्री पद के जितने भी दावेदार हैं, उनमें किसके पास अनुभव है। केवल वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से ही भाजपा शिवसेना सरकार में मंत्री रहे हैं। देवेंद्र फड़नवीस, विनोद तावड़े और सुधीर मुनगंटीवार ने कभी सरकार में काम नहीं किया।'
पंकजा बोलीं, गोपीनाथ मुंडे थे सबसे लोकप्रिय नेता
पंकजा का कहना है कि उनके पिता गोपीनाथ मुंडे पूरे महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय नेता थे। उस समय, ये सभी नेता जिन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा है, अपने-अपने जिलों में सिमटे हुए थे। मैंने अपने पिता के साथ जमीनी स्तर पर काम किया।'
उन्होंन कहा कि मैं मानती हूं कि वे सभी मेरे वरिष्ठ हैं। विधायक के रूप में मेरा एक ही कार्यकाल का अनुभव है, लेकिन मैंने भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में काम किया है। महाराष्ट्र में कई बड़ी रैलियां करवाई है।
उन्होंने कहा कि मुंडे के निधन के बाद ये सभी नेता महाराष्ट्र के बड़े नेता बन पाए। अन्यथा फड़नवीस कानपुर तक सिमटे थे, तावड़े मुंबई और मुनगंटीवार चंद्रपुर तक। जब मुंडे शीर्ष पर थे तो ये सभी 8वें या 9वें नंबर के नेता थे।
अमित शाह ने की थी पंकजा की तारीफ
पंकजा ये मानती हैं कि फड़नवीस का अकेडमिक अनुभव बहुत है, जबकि तावड़े विपक्ष के नेता के रूप में भी काम कर चुके हैं। फिर भी पार्टी की वास्तविक नेता वही हैं। पंकजा का कहना है कि उनकी रैलियों में अन्य नेताओं की रैलियों के अपेक्षा ज्यादा भीड़ रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भी उनकी तारीफ की थी।
अमित शाह ने जब उनकी रैलियों की भीड़ देखी तो कहा कि ये लड़की इतने लोगों को कहां से ले आती है। पंकजा कहती हैं कि यदि मेरी रैलियों में भीड़ आती है तो इसका मतलब है कि मुझे नेता के रूप में स्वीकार किया जाता है।
पंकजा को अपने मुख्यमंत्री बनने के इतना भरोसा है कि उन्होंने ये भी तय कर लिया है कि मुख्यमंत्री के रूप वे कौन से विभाग अपने पास रखेंगी। उन्होंने कहा में गृहमंत्रालय अपने पास रखूंगी। इसे संभालना चुनौतीपूर्ण है।
पंकजा ने साक्षात्कार में शिवसेना के साथ समझौते के भी संकेत दिए। उनसे जब पूछा गया कि यदि भाजपा को बहुमत न मिला तो पार्टी क्या करेगी? पंकजा ने कहा कि शिवसेना हमारी पुरानी सहयोगी है। अगर पार्टी ने मुझे मुध्यस्थता की जिम्मेदारी दी तो मैं शिवसेना-भाजपा गठबंधन के लिए प्रयास करूंगी।
वहीं, भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के नेता विनोद तावड़े का कहना है कि पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर रेस नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि नतीजे आ जाने के बाद चुने हुए विधायक ही नए नेता का चुनाव करेंगे। उस नेता का नाम ही केंद्रीय संसदीय समिति को भेजा जाएगा और समिति ही निर्णय लेगी।