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गुजरात के एक शहर में नहीं बिकेगा मांस?

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गुजरात के भावनगर ज़िले में स्थित पालीताणा के स्थानीय निकाय ने शहर में मांस की ख़रीद बिक्री को बंद करने का फ़ैसला किया है। अब इस पर आख़िरी फ़ैसला राज्य सरकार को लेना है। पालीताणा को शाकाहारी घोषित करने की मांग स्थानीय जैन समुदाय के लोग करते रहे हैं, जिन्हें कुछ हिंदू संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है।
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एक जैन मुनि कहते हैं, "विश्व में जितने भी पशु, पक्षी या जीव हैं, उन्हें भगवान ने बनाया है। किसी को यह अधिकार नहीं कि कोई इन्हें मारे, काटे या कष्ट दे।"

पालीताणा में जैन धर्म के कुछ प्राचीन और महत्वपूर्ण मंदिर हैं, जिनके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। जैन धर्म किसी पशु या पक्षी की बलि देने में विश्वास नहीं रखता और इसके ज्यादातर मानने वाले शाकाहारी होते हैं। तीर्थयात्री केतन शाह कहते हैं, "हमने देखा कि जगह-जगह नॉन वेजिटेरियन आइटम बहुत बिक रहे हैं, हमको बहुत धक्का लगा।"
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65 हज़ार की आबादी वाले इस शहर में 25 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है। कुछ अनुमानों के अनुसार यहां मांसाहारियों की संख्या अधिक है।
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मांस की बिक्री रोकने के फैसले के खिलाफ भी हैं लोग

स्थानीय निकाय ने पालीताणा में मांस की बिक्री और उसके खाने पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। एक स्थानीय मुसलमान धार्मिक नेता सैयद जहांगीर मियाँ कहते हैं कि पूरे शहर में मांस खाने पर प्रतिबंध लगाने का फैसला उचित नहीं है।

उनका कहना है, "जैन धर्म के जो पवित्र स्थान हैं वह पहाड़ी पर हैं और शहर से दूर हैं। मंदिरों के आस-पास कुछ दूर तक मांस की बिक्री पर रोक लगाना उचित होगा।"

पालीताणा को 'क़साई मुक्त' बनाने के इस आंदोलन को कुछ हिंदू संगठनों का समर्थन भी प्राप्त है। गुजरात सरकार ने आंदोलनकारियों को विश्वास दिलाया है कि वह पालीताणा शहर को शाकाहारी शहर घोषित करने के लिए वचनबद्ध है।

लेकिन कई प्रेक्षक इस आंदोलन में धर्म के साथ-साथ राजनीति का भी दख़ल मानते हैं। वैसे टीकाकार अजीत साही कहते हैं, "भाजपा पहली बार अपने बल पर शासन में आई है। उस पर पहले भी धर्मों के बीच टकराव के आरोप हैं। मुझे डर है कि इस प्रकार की घटनाएं कहीं बढ़ ना जाएं।"
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