अफजल गुरू को फांसी दिये जाने के बाद पाकिस्तान की जेल में बन्द भारतीय नागरिक सरबजीत की रिहाई मुश्किल में पड़ सकती है। सूत्रों ने कहा है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान सरकार इसका बदला सरबजीत को फांसी देकर लेगा।
49 वर्षीय सरबजीत को सन् 1990 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हु्ए बम धमाके में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस धमाके में 14 लोगों की जान गई थी। गिरफ्तारी के बाद सरबजीत को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी।
बाद में सरबजीत ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति के पास क्षमा याचिका दायर की। उस याचिका पर अब तक पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कोई फैसला नहीं लिया है। अब अफजल गुरू की फांसी के बाद सरबजीत सिंह मामले पर पाक सरकार क्या फैसला लेती है यह देखने वाली बात होगी।
सरबजीत ने अभी हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के पास क्षमा याचिका भेजी है। सरबजीत सिंह के आतंकवादी होने पर अभी संदेह है लेकिन पाकिस्तान उसे इसी श्रेणी में रखता है। ऐसे में अफजल गुरू की फांसी का असर सरबजीत मुद्दे पर पड़ सकता है।
वहीं, अफजल गुरू को फांसी दिये जाने से सरकार और न्याय व्यवस्था पर भारत के लोगों का फिर से कुछ भरोसा बनेगा। इसके अलावा वोट पाने के लिए कुछ भी करने की सरकार की छवि में भी कुछ हद तक सुधार होगा।