पाकिस्तान ने रविवार को यू-टर्न लेते हुए कहा है कि वह मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर -ए-ताइबा के सरगना जकी उर रहमान लखवी की आवाज के नमूने भारत को नहीं सौंपेगा।
पाक सरकार ने कहा कि लखवी की आवाज का नमूना हासिल करने के लिए वह आतंकवाद निरोधी अदालत में कोई नई याचिका नहीं दायर करेगी।
जबकि शुक्रवार को ही रूस के उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान पाक पीएम नवाज शरीफ मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं की आवाज के नमूने देने को राजी हो गए थे।
नमूने के लिए पाक सरकार नहीं दायर करेगी नई याचिका
मुंबई हमला मामले में पाक की अभियोजन टीम के प्रमुख चौधरी अजहर ने रविवार को कहा है कि लखवी की आवाज का नमूना मुहैया करा पाना हमारे लिए संभव नहीं होगा।
अजहर ने कहा कि चार साल पहले 2011 में हमने मुंबई हमले की सुनवाई कर रहे रावलपिंडी कोर्ट में अर्जी देकर लखवी की आवाज के नमूने मांगे थे। मगर न्यायाधीश मलिक अकरम अवान ने किसी आरोपी की आवाज का नमूना लेने के लिए देश में कोई कानून नहीं होने का हवाला देते हुए हमारी याचिका खारिज कर दी थी।
अजहर ने कहा कि नमूना हासिल करने के लिए पाकिस्तान की सरकार आतंकवाद निरोधी अदालत में कोई नई याचिका दायर नहीं करेगी। अजहर के बयान से ऐसा माना जा रहा है कि मोदी के साथ शरीफ की प्रतिबद्धता के बावजूद भी पाकिस्तान मुंबई हमले के आतंकियों को सजा दिलाने की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।
अजहर ने बताया, ‘हमने भारत को लिखित में कहा है कि पाकिस्तान में ऐसा कोई कानून नहीं है, जो किसी आरोपी की आवाज के नमूने हासिल करने की इजाजत देता हो। भारत और अमेरिका तक में भी ऐसा कोई कानून नहीं है।’ उन्होंने कहा कि ऐसा कानून केवल पाकिस्तान की संसद के जरिए ही बन सकता है।
कहा, भारत और पाक में नहीं है कानून
अजहर ने कहा कि भारत को लिखित में बता दिया गया है कि पाकिस्तान में कोई ऐसा कानून नहीं है, जिसके तहत आरोपी की आवाज का नमूना लिया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका में भी आरोपियों की आवाज के नमूने लेने के संबंध में किसी तरह के कानून नहीं है।
सुनवाई की प्रक्रिया में तेजी पर बनी थी सहमति
उफा में शंघाई सहयोग
संगठन से इतर शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष
नवाज शरीफ की मुलाकात में मुंबई हमले की सुनवाई की प्रक्रिया तेज करने पर
सहमति बनी थी। शरीफ इस हमले के साजिशकर्ताओं की आवाज के नमूने भारत को देने
के लिए राजी हो गए थे। बैठक के बाद जारी साझा बयान में भी पाकिस्तान में
मुंबई हमले की सुनवाई तेज करने के तौर-तरीकों पर चर्चा करने की भी सहमति बन
गई थी।
पाक के मंत्री ने भी नहीं दिया कोई भरोसा
पाक के सूचना मंत्री परवेज राशिद ने भी अपनी सरकार की ओर से ऐसा नहीं दर्शाया कि इस मामले को संसद में ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाक ने मुंबई हमले का मुद्दा इसलिए साझा बयान में शामिल किया कि हम चाहते थे कि भारत अपने आरोपियों के खिलाफ हमें ‘ठोस साक्ष्य’ मुहैया कराए।
उन्होंने दावा किया कि पाक मुंबई हमले के आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला रहा है, मगर भारत ने अभी तक ठोस साक्ष्य मुहैया नहीं कराया है। लखवी को हाल ही में पाक की कोर्ट ने नवाज शरीफ द्वारा कमजोर साक्ष्य मुहैया कराने पर उसे रिहा कर दिया था।