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पाक जासूस इजाज का दोबारा होगा सच से आमना-सामना

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आईएसआई के लिए सेना और देश की जासूसी करने वाला एजेट इजाज का एक बार फिर सच से आमना-सामना होगा। उससे बरामद गैजेट्स (लैपटॉप, मोबाइल फोन, पैन कार्ड) की एफएसएल रिपोर्ट के बल पर नए सिरे से शिकंजा कसने की तैयारी है। विश्लेषण का काम पूरा होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर उसे दोबारा कस्टडी रिमांड पर लेकर पुलिस और खुफिया एजेंसियों के अफसर घेरेंगे।
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गिरफ्तारी के बाद प्रारंभिक और छह दिनों के कस्टडी रिमांड के दौरान पूछताछ में पाक जासूस इजाज ने सेंट्रल और स्टेट इंटेलीजेंस के अफसरों के सामने कई सनसनीखेज खुलासे किए थे। लेकिन उसने अधिकांश उन्हीं बातों का जवाब दिया, जो अफसर पहले से जान चुके थे। अपने गैजेट्स से आईएसआई को सेना और देश की गोपनीय जानकारी भेजकर उसे डिलीट करने वाला शातिर इजाज काफी कुछ छिपाने में कामयाब हो गया था। अब जब इन गैजेट्स की सीबीआई लैब की फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आई तो काफी कुछ नई जानकारियां अफसरों के हाथ लगीं।

इस एफएसएल रिपोर्ट का पुलिस और एसटीएफ ही नहीं बल्कि केंद्रीय और राज्य गृह विभाग के अलावा अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी कर रही हैं। इस केस के विवेचक धर्मेंद्र कुमार की तरफ से रिपोर्ट की एक-एक प्रति इन सभी संबंधित विभागों को भेजी गई है। जहां से विश्लेषण रिपोर्ट मिलने के बाद इसे इजाज की केस डायरी में भी शामिल किया जाएगा।
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पुख्ता सुबूत मिल चुके

पाक जासूस के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक रिपोर्ट ने देशभर की खुफिया एजेंसियों में खलबली मचाई हुई है। वेस्ट यूपी और उत्तराखंड में सेना की गोपनीय जानकारियां इजाज पाकिस्तान भेज चुका है। जिससे सामने आ चुका है कि इजाज ने आईएसआई के नापाक मंसूबों को पूरा करने में मदद की है। इसके पुख्ता सुबूत फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस को मिल चुके हैं।

पाक जासूस कोलकाता और बरेली में सबसे ज्यादा रुका है। उसके किस-किस से संपर्क थे, कौन-कौन उससे बातचीत करता था। इसकी जांच पड़ताल एसटीएफ और पुलिस कर चुकी है। विवेचक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कोलकाता और बरेली से बहुत सुबूत मिले हैं। केस को मजबूत करने के लिए बरेली और कोलकाता जाकर इन तथ्यों को नए सिरे से प्रमाणिक किया जाएगा।

इजाज ने यमुना एक्सप्रेस वे, पिथौरागढ़, मेरठ, बरेली, कोलकात, दिल्ली कैंट की गोपनीय सूचनाएं आईएसआई को भेजी हैं। इजाज से मिलने लैपटॉप, मोबाइल फोन, पैन ड्राइव आदि की जांच में एक्सपर्ट को करीब पांच साल का डाटा मिला है। इनमें काफी कुछ जानकारियां हैं। जिनका विश्लेषण अभी चल रहा है।
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