जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद के जरिए हासिल करने की मुहिम में लगे पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा में कश्मीरियों से ज्यादा पाकिस्तानी पंजाब के लोग शामिल हैं।
लश्कर की पूरी ताकत के करीब 90 फीसदी सेंट्रल पंजाब के गुजरांवाला, फैसलाबाद और लाहौर जैसे आधुनिक शहर से चुने गए लोग हैं। लश्कर के मारे गए 900 आतंकियों के अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला है कि पाकिस्तान शहरी आतंकवाद के दौर से गुजर रहा है।
फैसलाबाद स्थित संस्था पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ पीस स्टडीज (पीआईपीएस) द्वारा जारी पाकिस्तान सिक्योरिटी रिपोर्ट 2010 में कहा गया है कि लश्कर में भर्ती होने वाले नए लड़के पढ़े लिखे और तकनीक के माहिर हैं। रिपोर्ट ने पाक सरकार के उन दावों की पोल खोल दी है जिसमें भारत के आतंकी वारदातों में पाकिस्तानियों के शामिल नहीं होने की बात कही जाती है।
पाकिस्तान में होने वाले आम चुनाव से पहले की गए सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सर्वे के मुताबिक पाक पंजाब में कट्टरवाद का नया रूप देखने को मिल रहा है। इस्लामी कानून शरिया के मुताबिक सजा देने का समर्थन सबसे ज्यादा इसी इलाके में देखा गया है।
इसके अलावा सरकारी और निजी संस्थानों में गैर इस्लामी मुलाजिमों का विरोध भी इसी भाग में देखा जा रहा है। इस सर्वे के साथ पीआईपीएस ने अमेरिकी मिलिट्री अकादमी की कम्बैटिंग टेररिज्म सेंटर (सीटीसी) के अलग से किए गए सर्वे को जारी किया है।
सीटीसी के सर्वे के मुताबिक पंजाब सहित पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में एक ही परिवार, समाज और पृष्ठभूमि से लश्कर और सेना में भर्ती लोगों के कई उदाहरण सामने आए हैं। संस्था के मुताबिक यह हालात लश्कर और पाक सेना की साठगांठ की सबसे बड़ी वजह है।
पीआईपीएस की रिपोर्ट में पाकिस्तान के पूर्व वायुसेना अधिकारी के पढ़े लिखे और अंग्रेजीदा बेटे फैजल शहजाद का जिक्र है जिसे न्यूयॉर्क के टाइम स्क्वायर में धमाके करने के लिए चुना गया था।रिपोर्ट में ऐसे कई उदाहरण पेश किए गए हैं जो इस इस बात को सिरे से नकारते हैं कि आतंकवाद की तरफ गरीब और अनपढ़ लड़के ही आकर्षित होते हैं।