पाकिस्तान में पिछले कई हफ्तों से प्रदर्शनकारियों का विरोध झेल रही नवाज शरीफ सरकार को राजनीतिक तौर पर बड़ी राहत मिली है।
मंगलवार को मौजूदा सियासी संकट पर चर्चा करने के मकसद से बुलाए गए संसद के आपातकालीन संयुक्त सत्र में ज्यादातर सांसदों ने शरीफ सरकार को अपना समर्थन देने का ऐलान किया।
वहीं, सरकार ने हिंसक हुए प्रदर्शनों को ‘पाकिस्तान के खिलाफ बगावत’ करार दिया।
संसद के आपातकालीन संयुक्त सत्र में आंतरिक मामलों के मंत्री चौधरी निसार अली खान ने प्रदर्शनों पर कहा,‘इस संसद को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। यह न तो प्रदर्शन है और न ही धरना और न ही कोई राजनीतिक सभा है। दरअसल यह पाकिस्तान के खिलाफ बगावत है।’
उन्होंने कहा, ‘वे सुप्रीम कोर्ट, संसद के गेट तक पहुंच गए।
सोमवार को प्रदर्शनकारी एक अन्य सरकारी इमारत में घुस गए और ताहिर उल कादिरी जिंदाबाद के नारे लगाए।’ निसार ने कहा कि प्रदर्शनकारी हथियारों से लैस थे।
भीड़ में उग्रवादी संगठन के 1500 लोग थे। प्रदर्शनकारियों को ‘घुसपैठिया’ करार देते हुए उन्होंने संसद से आग्रह किया कि विद्रोह के खिलाफ कड़े कदम उठाने का ऐलान करे उनसे निपटने के लिए सांसद सरकार को दिशानिर्देश दें।