पहले चमेल सिंह और अब सरबजीत सिंह, दोनों भारतीय कैदियों की हमला कर हत्या कर दी गई। दोनों पर हमला हुआ, पाकिस्तान की सबसे सुरक्षित कही जाने वाली कोट लखपत जेल में।
क्या आप जानते हैं कि ये वही जेल है, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त, कि जेल के सामने किसी को भी पलभर के लिए रुकने की अनुमति नहीं।
पाकिस्तान स्थित श्री कटासराज की यात्रा पर गए भारतीय दल के सदस्य वासुदेव शर्मा व संजीव आदि ने बताया कि जब वे पाकिस्तान की कोट लखपत जेल के सामने से गुजर रहे थे तो अचानक उनकी गाड़ी जेल के पास यातायात व्यवस्था के चलते कुछ धीरे हुई तो जेल के बाहर खड़े सुरक्षा कर्मी ने उन्हें तुरंत वहां से निकल जाने का इशारा कर दिया।
इस जेल के बाहर ऐसी व्यवस्था से पता चलता है कि इस जेल की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तानी प्रशासन कितना चौकस था।
जहां जेल की बाहर की सुरक्षा इतनी पुख्ता दिखाई दे रही थी, उसी जेल में कैदियों ने हमला कर पहले भारतीय नागरिक चमेल सिंह और अब सर्बजीत की हत्या कर डाली, इस बात पर भी विश्वास नहीं हो रहा।
पाकिस्तान की जेल में पिछले 2 दशकों से भी अधिक समय से सर्बजीत को विभिन्न प्रकार की यातनाएं दी जा रही थीं और उसने खुद भी अपने ऊपर हमले की आशंका जताई थी। बावजूद इसके उसकी सुरक्षा को लेकर कोताही बरती गई और आखिरकार जिसका डर था वही घटना सामने आई।
सरबजीत और चमेल की मौत के बाद कोट लखपत जेल में बंद 36 अन्य भारतीय कैदी बेहद डरे हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार उनमें भय और असुरक्षा का माहौल घर कर गया है। हर कोई इस आशंका से सहमा हुआ है कि अब किसकी बारी है।
चमेल सिंह की जब मौत हुई थी तो उस समय भी पाकिस्तान ने घोर लापरवाही बरती थी। गंभीर हालत में उन्हें भी जेल से लाहौर के जिन्ना अस्पताल में ही लाया गया था। जहां डॉक्टरों ने चमेल का मृत घोषित कर दिया था।
उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि मौत तो 15 जनवरी को हुई, लेकिन उनके शव का पोस्टमार्टम 13 मार्च को लाहौर के जिन्ना अस्पताल में कराया गया।
रिपोर्ट में चमेल के पार्थिव शरीर पर चोट के निशान पाए जाने का जिक्र था।
कोट लखपत जेल की क्षमता चार हजार कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में इसमें 17 हजार लोग कैद हैं।