पाकिस्तान में ज्यादा भारतीय कार्यक्रम दिखाने के आरोप में टीवी चैनलों पर जुर्माने के बाद अब भारतीय फिल्मों के लिए भी कुछ पाबंदियां लगा दी गई हैं।
लाहौर हाईकोर्ट ने पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों को रिलीज किए जाने के लिए कुछ शर्तें तय कर दी हैं।
लाहौर हाईकोर्ट के जस्टिस खालिद महमूद की पीठ ने यह अंतरिम आदेश विवादास्पद टीवी टॉक शो होस्ट मुबशीर लुकमान की एक याचिका पर जारी किया है।
फिल्म प्रोड्यूसर रह चुके मुबशीर भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। लुकमान ने कहा कि नियमों के मुताबिक पाकिस्तान में वैसी फिल्मों का प्रदर्शन नहीं हो सकता, जो पूरी तरह भारत में शूट की गई हों या जिनका प्रायोजक भारतीय हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन के लिए नकली स्पांसर खड़े किए जा रहे हैं। जाली दस्तावेजों के सहारे प्रायोजकों की पहचान बदली जा रही है।
उन्होंने अपने इन तर्कों के समर्थन में एक कोर्ट ऑर्डर भी पेश किया। इस पर अदालत ने अधिकारियों से कहा कि वे ऐसी भारतीय फिल्मों का प्रदर्शन न होने दें, जो जाली दस्तावेजों के आधार पर मुल्क में रिलीज की जा रही हैं या फिर जिनका स्पांसर कोई पाकिस्तानी व्यक्ति न हो।
अदालत ने फिल्म सेंसर बोर्ड और रेवेन्यू बोर्ड से 25 तारीख को अगली सुनवाई की तिथि तक जवाब तलब किया है। अदालत का यह फैसला पाकिस्तान के दस मनोरंजन चैनलों पर एक सीमा से अधिक भारतीय और अन्य देशों का कंटेंट दिखाने के लिए एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने की कार्रवाई के बाद आया है। पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक के आदेश पर यह जुर्माना लगाया गया है।
बॉलीवुड फिल्मों की पाक में धूम
पाकिस्तान ने 1965 की लड़ाई के बाद भारतीय फि ल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी थी। पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने 2006 में भारतीय फिल्मों के आयात पर लगी पाबंदियों को ढीला कर दिया था। इसके बाद भारतीय फिल्मों ने पाकिस्तानी बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाना शुरू किया।
भारतीय फिल्में भारत और पाकिस्तान में एक ही दिन रिलीज होती हैं। बॉलीवुड की फिल्मों की लोकप्रियता ने पाकिस्तान में लाहौर और इस्लामाबाद में क ई सिनेप्लेक्स खड़े करवा दिए हैं। वहां भारतीय फिल्मों की नकली कॉपी भी उपलब्ध रहती है।