गुजरात में एक ‘साहेब’ के लिए महिला की जासूसी कराने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने इस मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।
शर्मा ने अदालत से न्यूज पोर्टल की ओर से प्रसारित ऑडियो टेप पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया और कहा कि इसमें इस बात के सबूत हैं कि राज्य सरकार ने कैसे उन्हें फर्जी मामलों में फंसाने का प्रयास किया था।
चीफ जस्टिस पी सदाशिवम, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने शर्मा से मामले में हलफनामा दायर करने को कहा।
गुजरात सरकार के वकील का कहना था कि रिकार्ड में तथ्य पेश किए जाने तक किसी प्रकार की मौखिक दलील की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
मामले में शर्मा के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पिछली सुनवाई के बाद महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इसलिए इस पर जल्द सुनवाई की जाए। बेंच ने मामले की सुनवाई दिसंबर के पहले सप्ताह में तय की।
दो खोजी पोर्टल कोबरापोस्ट और गुलेल ने 15 नवंबर को दावा किया था कि गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह ने किसी साहब की ओर से एक महिला की गैरकानूनी तरीके से निगरानी करने का आदेश दिया था।
पोर्टल ने शाह और आईपीएस अधिकारी के बीच हुई बातचीत के टेप जारी किए थे। साल 1984 बैच के आईएएस अधिकारी शर्मा पर कच्छ जिले में भूमि आवंटन में कथित अनियमितता सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं।