विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के संबंध में पाकिस्तान की ओर से अब तक उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं हैं। इस मामले में भारत की ओर मांगी गई सूची पर पाक की प्रतिक्रिया द्विपक्षीय वार्ता में ठोस प्रगति के लिहाज से चिंताजनक है।
पिछले साल के भारत-पाक संबंधों का जायजा लेते हुए खुर्शीद ने कहा कि अभी तक इस्लामाबाद ने जो किया है, वह हमारे लिए संतोषजनक नहीं है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि भारत यात्रा के दौरान पाक गृह मंत्री रहमान मलिक के विवादास्पद बयान दोनों देशों के बीच वार्ता प्रक्रिया में बाधा नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि हम सभी का मानना है कि अगर पाक भारत की मांग सूची पर उचित कदम उठाता है तो वार्ता सहज तरीके से, तेजी से और सही दिशा में आगे बढ़ेगी। बुनियादी पहलुओं को पूरा किया जाना जरूरी है। जब तक यह नहीं होता तब तक हम ठोस प्रगति नहीं कर पाएंगे।
पाकिस्तान की ओर से भारत को सर्वाधिक तरजीह राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा देने में देरी के मसले पर खुर्शीद ने कहा कि भारत उन्हें इस संबंध में मनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि ऐसा होना चाहिए। इसमें बेमियादी देरी नहीं होनी चाहिए।
खुर्शीद ने कहा कि हमें उन्हें पटरी पर लौटाना होगा, यदि उन्हें दिक्कत है तो वे हमें जरूर बताएंगे और जाहिर है कि जब इस पर बात हो रही है तो उन्हें सारी समस्याओं और दबावों के बारे में बताना चाहिए। खुर्शीद ने कहा कि हम चाहेंगे कि आगे बढ़ा जाए और हम उन्हें निश्चित तौर पर ऐसा करने के लिए मनाएंगे। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा हमेशा एजेंडे में है।
खुर्शीद ने इस धारणा को भी खारिज कर दिया कि भारत को एमएफएन का दर्जा दिए जाने में देरी के पीछे पाकिस्तान की सेना है। भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों पर खुर्शीद ने कहा कि साझेदार के तौर पर भारत के लिए चीन अहमियत रखता है। उन्होंने कहा कि चीन साझेदार है और वह सहयोगी हो सकता है। वह प्रतिस्पर्धी भी हो सकता है।