सिरसा के ऐलनाबाद क्षेत्र में पिछले करीब 20 वर्षों से रह रहे पाक विस्थापित हिंदुओं ने आज से कई वर्ष पूर्व भले ही खुला ऐलान किया था कि वे भारत में मर जाना पसंद करेंगे पर जीते जी पाकिस्तान का रुख नहीं करेंगे, लेकिन इन लोगों को हर पल यह भय सताता है कि कहीं उन्हें भारत से खदेड़ न दिया जाए।
भय के साये में जी रहे इन परिवारों को वर्ष 2003 में उस समय जरूर कुछ राहत मिली थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान से भारत आकर बसे इन पाक हिंदुओं को भारत की नागरिकता देने की घोषणा की थी। इस घोषणा से पाक विस्थापित हिंदुओं में नवउत्साह का संचार हुआ था। लेकिन उस घोषणा पर अभी तक अमल नहीं हुआ। अब केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार आने पर इन्हें फिर से नागरिकता मिलने की उम्मीद जागी है।
ज्ञात रहे कि पाकिस्तानी कट्टरपंथियों के जुल्म का शिकार होकर पाकिस्तान से ये लोग भारत में तीर्थ यात्रा के बहाने आए थे परंतु वापस नहीं गए। क्षेत्र में दो दशकों से रह रहे पाकिस्तानी हिंदू परिवार भारत की नागरिकता पाने के लिए कड़ी मशकत कर रहे हैं, किंतु उनको किसी तरफ से किसी प्रकार की कोई आशा की किरण दिखाई नहीं दे रही है।
इन परिवारों के ऊपर उस वक्त मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा जब भारत में सन 1992 को बाबरी मस्जिद को अस्त-व्यस्त किया गया। उस वक्त पाकिस्तान ने वहां रह रहे हिंदू परिवारों के विरूद्ध रोष प्रकट किया और वहां के हिंदू परिवारों को कडी नजर से दे देखा जाने लगा। उसका परिणाम यह रहा कि पाकिस्तान हिंदू परिवार अपने आप को वहां असुरक्षित समझने लगे और अपने देश की ओर आकर अपने को सुरक्षित समझने का संकल्प लिया।
टूरिस्ट वीजा लगाकर आए 66 परिवार
करीब 200 हिंदू लोग सन 1992, 94, 96 व 1999 में हिंदू गांव हरिपुरा, ममेरा कलां, नीमला व ऐेलनाबाद शहर में दो महीनों का टूरिस्ट वीजा लेकर आए थे। भारत में आने वाले 66 हिंदू परिवारों में से कुल 190 लोगों के पास पास्पोर्ट थे और अब तक इनमें से सात लोग मर चुके हैं। इसलिए पासपोर्टधारी घट कर 183 रह गए। अब उनके पासपोर्ट रिन्यू करवाने की तारीख भी खत्म हो गई है, जिसके कारण ये लोग मुसीबत में फंसे है।
नहीं कोई प्रमाण-पत्र
इन लोगों के पास न कोई जाति प्रमाण-पत्र है, न ही किसी तरह का रिहायशी प्रमाण-पत्र है। इसलिए इनके बच्चों को कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल रहा है। इससे इनके बच्चों का भविष्य भी अंधकार में है। हरियाणा सरकार द्वारा लोगों को दी जाने वाली सुख-सुविधाओं से भी उन्हें वंचित रहना पड़ रहा है।