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भारत में डर-डर के जीने को मजबूर ये हिंदू

Mon, 10 Nov 2014 12:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऐलनाबाद (सिरसा)
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सिरसा के ऐलनाबाद क्षेत्र में पिछले करीब 20 वर्षों से रह रहे पाक विस्थापित हिंदुओं ने आज से कई वर्ष पूर्व भले ही खुला ऐलान किया था कि वे भारत में मर जाना पसंद करेंगे पर जीते जी पाकिस्तान का रुख नहीं करेंगे, लेकिन इन लोगों को हर पल यह भय सताता है कि कहीं उन्हें भारत से खदेड़ न दिया जाए।
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भय के साये में जी रहे इन परिवारों को वर्ष 2003 में उस समय जरूर कुछ राहत मिली थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान से भारत आकर बसे इन पाक हिंदुओं को भारत की नागरिकता देने की घोषणा की थी। इस घोषणा से पाक विस्थापित हिंदुओं में नवउत्साह का संचार हुआ था। लेकिन उस घोषणा पर अभी तक अमल नहीं हुआ। अब केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार आने पर इन्हें फिर से नागरिकता मिलने की उम्मीद जागी है।

ज्ञात रहे कि पाकिस्तानी कट्टरपंथियों के जुल्म का शिकार होकर पाकिस्तान से ये लोग भारत में तीर्थ यात्रा के बहाने आए थे परंतु वापस नहीं गए। क्षेत्र में दो दशकों से रह रहे पाकिस्तानी हिंदू परिवार भारत की नागरिकता पाने के लिए कड़ी मशकत कर रहे हैं, किंतु उनको किसी तरफ से किसी प्रकार की कोई आशा की किरण दिखाई नहीं दे रही है।
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इन परिवारों के ऊपर उस वक्त मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा जब भारत में सन 1992 को बाबरी मस्जिद को अस्त-व्यस्त किया गया। उस वक्त पाकिस्तान ने वहां रह रहे हिंदू परिवारों के विरूद्ध रोष प्रकट किया और वहां के हिंदू परिवारों को कडी नजर से  दे देखा जाने लगा। उसका परिणाम यह रहा कि पाकिस्तान हिंदू परिवार अपने आप को वहां असुरक्षित समझने लगे और अपने देश की ओर आकर अपने को सुरक्षित समझने का संकल्प लिया।

टूरिस्ट वीजा लगाकर आए 66 परिवार
करीब 200 हिंदू लोग सन 1992, 94, 96 व 1999 में हिंदू गांव हरिपुरा, ममेरा कलां, नीमला व ऐेलनाबाद शहर में दो महीनों का टूरिस्ट वीजा लेकर आए थे। भारत में आने वाले 66 हिंदू परिवारों में से कुल 190 लोगों के पास पास्पोर्ट थे और अब तक इनमें से सात लोग मर चुके हैं। इसलिए पासपोर्टधारी घट कर 183 रह गए। अब उनके पासपोर्ट रिन्यू करवाने की तारीख भी खत्म हो गई है, जिसके कारण ये लोग मुसीबत में फंसे है।

नहीं कोई प्रमाण-पत्र
इन लोगों के पास न कोई जाति प्रमाण-पत्र है, न ही किसी तरह का रिहायशी प्रमाण-पत्र है। इसलिए इनके बच्चों को कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल रहा है। इससे इनके बच्चों का भविष्य भी अंधकार में है। हरियाणा सरकार द्वारा लोगों को दी जाने वाली सुख-सुविधाओं से भी उन्हें वंचित रहना पड़ रहा है।
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किए अथक प्रयास

काफी समय पहले इन लोगों ने भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक अपनी बात को रखा, जहां से उन्हें नागरिकता मिलने के आसार थे। अदालत ने आदेश जारी किए थे कि इनका पूरा विवरण फॉर्म भरवाकर भेजा जाए। उस समय उपायुक्त सिरसा को इन परिवारों की वीडियोग्रॉफी करने के आदेश दिए गए। इस कार्य के लिए नियुक्त अधिकारियों ने परिवार के रहन-सहन, पूजा-पाठ आदि संपूर्ण जानकारी लेकर कोर्ट को भिजवा दी। इससे पता चला कि 65 परिवार मेघवाल व एक परिवार भील जाति से संबंध रखने वाले हैं। ये परिवार भारत की नागरिकता के लिए कई बार सिरसा प्रशासन के जरिए फॉर्म प्रदेश व केंद्रीय गृह विभाग को भेज चुके हैं, लेकिन अबतक कोई रिजल्ट नहीं आया।

तीन साल बाद भी नहीं हुई सुनवाई
66 परिवारों के मुखिया सुरताराम, भियाराम, मुकेश कुमार, नोतनराम व रामचंदर आदि ने बताया कि जिला प्रशासन ने जून 2011 में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के आदेश अनुसार ऐलनाबाद के तत्कालीन एसडीएम के जरीए नागरिकता हासिल करने के लिए पूर्ण दस्तावेजों के साथ 500 रुपये प्रति पासपोर्ट के चालान भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडियां में जमा करवा चुके हैं। तीन साल बीत जाने के बाद भी इनकी किसी तरफ से कोई सुनवाई नहीं हुई।

राजस्थान सरकार ने 2005 में दी नागरिकता
राजस्थान में जोधपुर, जयपुर व जैसलमेर आदि जिलों में रह रहे सैकड़ों पाकिस्तानी हिंदू परिवारों को राजस्थान सरकार ने सन 2005 में ही भारतीय नागरिकता दे दी थी। उन्होंने बताया कि आज उन सभी परिवारों को सरकार द्वारा मिलने वाली सुख-सुविधाएं मिल रही हैं। परंतु हरियाणा सरकार ने दो दशक बीत जाने के बाद भी इनके लिए किसी तरह का कोई कदम नहीं उठाया।

क्या कहते है एसडीएम
इस संबंध में एसडीएम धीरेंद्र खडगटा ने कहा कि उन्हें ऐलनाबाद के एसडीएम का पदभार संभाले थोड़ा ही समय हुआ है। अभी वह यहां से पूरी तरह अवगत नहीं हो पाए हैं। उनके पूर्व रह चुके एसडीएम व जिला उपायुक्त ने पाक विस्थापित इन नागरिकों का मामला गृह मंत्रालय को भेजा हुआ है, लेकिन वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। वह उपायुक्त से इस विषय में बात करेंगे। साथ ही उपमंडल प्रशासन द्वारा जो भी कार्रवाई बनती हो वह जरूर करेंगे।
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