भारत और पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकारों के बीच रिश्तों में सुधार की गंभीर पहल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपमहाद्वीप में मजबूत होती स्थिति से पाक सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई तिलमिला गई हैं। यही वजह है कि वे माहौल बिगाड़ने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं।
पाक सेना सीमा पर लगातार गोलीबारी कर भारतीय सेना को उकसा रही है तो जम्मू-कश्मीर में आईएसआई का तंत्र अलगाववादी तत्वों को भड़का कर घाटी का तापमान बढ़ाने की कोशिश में है। उधर बाघा बार्डर पर ईद के मौके पर मिठाई के आदान प्रदान की परंपरा ठुकराकर पाक रेंजर्स ने भी अपनी मंशा साफ कर दी है।
पाक सेना की सीमित जमीन का फायदा उठाने की कोशिश में
उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि बैक चैनल बातचीत जारी रखते हुए भारत सीमा पर पाक सेना और रेंजर्स को एक के बदले दस गोली चलाकर काबू में रखने की नीति पर काम कर रहा है।
पाक सेना की मजबूरी यह है कि वह अफगानिस्तान सीमा पर बुरी तरह उलझी हुई है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय कूटनीतिज्ञ बारीकी से भांप रहे हैं कि इन हालात में पाकिस्तानी सेना अपनी पूर्वी सीमा पर भारत के साथ बड़ा जोखिम नहीं उठाएगी।
साथ ही पाकिस्तानी सेना की ओर से लोकतांत्रिक सरकार के तख्ता पलट के हथियार के इस्तेमाल की संभावना भी फिलहाल नहीं है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका और चीन का पाक सेना पर दबाव भी माना जा रहा है।
अमेरिका- चीन दबाव, पाक सेना के तख्ता पलट करने की संभावना कम
लेकिन रूस के उफा में मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साझा बयान की गंभीरता से असहज पाक सेना प्रमुख राहील शरीफ ने सरकारी तंत्र पर लगातार दबाव बनाया हुआ है।
उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक नवाज शरीफ के सुरक्षा और विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज का कश्मीर पर बयान देना उसी दबाव का नतीजा था।
सूत्रों के मुताबिक सीमा पर पाक गोलीबारी के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने बुधवार और बृहस्पतिवार के बीच तीन बार फोन पर पाकिस्तानी समकक्ष से बात की लेकिन पाक सेना नेतृत्व के दबाव के चलते उधर से फिलहाल गर्मजोशी नहीं है।
बातचीत को पटरी से उतारने की कोशिश में पाक सेना
हालांकि दोनों सरकारों ने उफा के साझा बयान से पहले तय हुए पांच मुद्दों के साथ आगे बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता पर अब तक कायम रखी है।
यही वजह है कि अगले महीने पाक एनएसए के साथ मुलाकात और बीएसएफ-पाक रेंजर्स व महानिदेशक मिलिट्री ऑपरेशन की बातचीत के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
सूत्रों ने बताया कि अगले साल सार्क सम्मेलन के लिए पीएम मोदी की प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा से पहले दोनों सरकार रिश्ते की मौजूदा स्थिति को बेहतर बनाने में जुटे हैं।