आल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन(एमआईएम) के अध्यक्ष और सांसद असदउद्दीन ओवैसी आजमगढ़ का एक गांव गोद लेंगे।
औवेसी ने बीबीसी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में ये बात कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी क्षेत्र बनारस के जयापुर गांव को गोद लिया है। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों के एक गांव को गोद लेने की योजना भी बनाई है।
ओवैसी ने कहा, "मैंने तय किया है कि मैं आजमगढ़ में एक गांव गोद लूंगा, तीन-चार गांवों के नाम है, एक-दो दिन में तय कर लूंगा।" ओवैसी के इस फैसले से कई लोगों के कान खड़े हो सकते हैं। आजमगढ़ ही क्यों हैदराबाद क्यों नहीं जहां से वो सांसद हैं?
इसपर उन्होंने कहा कि वो इस देश के नागरिक हैं और लोकतंत्र में उन्हें इस बात का अधिकार है कि वो देश के किसी गांव को गोद ले सकते हैं।
चुनाव की तैयारी कर रहे है ओवैसी
आजमगढ़ हाल के सालों में चरमपंथी गतिविधियों के इल्जाम के लिए सुर्खियों में रहा है। बीजेपी के एक नेता ने इसे हाल में चरमपंथियों का गढ़ भी कहा जिससे काफी विवाद खड़ा हो गया था।
इस पर ओवैसी ने कहा कि वो इसीलिए ही आजमगढ़ के गांव को गोद लेना चाहते हैं। वो लोगों को ये बताना चाहते हैं कि आजमगढ़ पर लगा ये इल्जाम गलत है।
असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम उत्तर प्रदेश में अगले विधान सभा चुनाव में भाग लेने की तयारी में जुटी है। इसकी पुष्टि खुद ओवैसी ने की। शायद आजमगढ़ के गांव को गोद लेने का फैसला इसकी एक कड़ी हो।
हाल में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में दो सीटें जीतने के बाद पार्टी का हौसला बुलंद है। ओवैसी ने पश्चिम बंगाल में भी चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनकी पार्टी दिल्ली में चुनाव लड़ने की संभावना भी तलाश रही है।
उनके अनुसार उन्होंने मुसलमानों और दलितों के सामाजिक विकास और उनकी सियासत में भागीदारी बढ़ाने के लिए इन राज्यों में
चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
मुसलमानों के नेता नहीं बनना चाहते ओवैसी
औवेसी ने कहा वो मुसलमानों के नेता नहीं बनना चाहते हैं बल्कि उनकी सेवा करना चाहते हैं और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में 18 प्रतिशत मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया, सेक्युलिरज्म के नाम पर, चुनकर पांच सांसद आए, पांचों एक ही परिवार के हैं, मुसलमानों को क्या मिला?"
औवैसी मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी हो या 'मौलाना' मुलायम या फिर लालू यादव इन सभी ने मुसलमानों का नेतृव करने का दावा किया लेकिन केवल वोट हासिल करने के लिए। वो कहते हैं, "मुलायम जी 75 फीट का केक काटते हैं, 75वें जन्मदिन पर, हमें उस केक से हिस्सा नहीं चाहिए।"
जिन्ना नहीं बनना चाहते
उन्होंने इस बात को भी नकारा कि वो भारतीय मुसलमानो के एक और 'जिन्ना' बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "जिन्ना के पैगाम को हमने ठुकरा दिया, हमने भारत में रहने का फैसला किया, जिन्ना से हमें क्या लेना देना, जिन्ना की तारीफ करने मैं पाकिस्तान नहीं गया था, आडवाणी जी ने उनकी तारीफ की थी, मैं मुसलमानों का नेता नहीं हूं, मैं तो इंसाफ की बात कर रहा हूं।"
ओवैसी ने इस इल्जाम को भी गलत बताया कि उनकी पार्टी मुसलमानों को भड़का कर उनका वोट हासिल करना चाहती है। उनके भाई अकबरुद्दीन ने दो साल पहले कथित रूप से सांप्रदायिक और भड़काऊ भाषण दिया था जिसके लिए उन्हें 45 दिनों तक जेल
भी जाना पड़ा था।
ओवैसी ने कहा नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में कुछ लोगों ने इससे भी अधिक भड़काऊ भाषण दिया है उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? उन्होंने कहा उनकी पार्टी में कई हिंदू हैं और वो अहम पदों पर हैं।