भारत और अमेरिका के आपसी संबंधों के लिहाज से नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा और बराक ओबामा के साथ उनकी मुलाक़ात के दौरान दो-तीन बातें बेहद अहम हुई हैं।
पहली बात तो यह है कि नरेंद्र मोदी ने आर्थिक योजना को तरजीह दी। निवेशकों के साथ उन्होंने न्यूयार्क में बातचीत की और इसके बाद वाशिंगटन डीसी में। इस दौरान मोदी ने काफी सकारात्मक संदेश भेजने की कोशिश की।
अमेरिकी उद्योगपतियों से जो प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, उसके मुताबिक निवेश करने वाला समुदाय फिर से भारत में पूंजी लगाने को तैयार हो सकता है।
दूसरी अहम बात ये हुई है कि व्हाइट हाउस और नरेंद्र मोदी के बीच वीजा के मुद्दे पर एक खाई पैदा हो गई थी। लेकिन मोदी इसे पूरी तरह से पलटने में कामयाब रहे।
मोदी अमेरिकी नेतृत्व के साथ व्यक्तिगत रिश्तों को विकसित करने में कामयाब रहे। रात्रि के भोजन के बाद जो बैठकें हुईं, उसमें भारत-अमेरिकी मिशन को आगे बढ़ाने की बात हुई।
हालांकि संयुक्त घोषणा पत्र में बहुत नई बातें नहीं हैं। 2012 में या 2013 में भारत-अमेरिका के बीच में जो बातें एजेंडे के तौर पर थीं, उन्हीं को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।