कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 1984 सिख दंगा के एक मामले से बरी किए जाने के विरोध में बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की आवाज पर लगभग पूरा विपक्ष एक हो गया।
यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा ने भी शिरोमणि अकाली दल का साथ दिया। बादल के अलावा लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज के नेतृत्व में विभिन्न पार्टी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और उनसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी से इन दंगों की जांच कराने को कहा।
यही नहीं बादल ने अपने बेटे सुखबीर सिंह बादल व पार्टी के दूसरे नेताओं के साथ इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात की। सज्जन कुमार को बरी किए जाने के खिलाफ पार्टी की ओर से जंतर मंतर पर आयोजित धरने में भी बादल शामिल हुए।
पंजाब के मुख्यमंत्री की अगुवाई में गए प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सिखों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वह सरकार को निर्देश दें कि सिख दंगों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी से स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि उन पुलिस कर्मियों की भूमिका की भी जांच हो, जिन्होंने न तो दंगों के दौरान पीड़ितों की एफआईआर दर्ज की और गुनहगारों का बचाव किया।
पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने बताया कि उनकी ओर से राष्ट्रपति से कहा गया कि पूरा देश इस मामले में उनकी ओर देख रहा है। उन्हें मौजूदा केंद्र सरकार से किसी तरह के न्याय की उम्मीद नहीं है।
प्रकाश सिंह बादल ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से भी दंगों की जांच कराने और सिख विरोधी दंगों के चल रहे केसों में अपने अधिवक्ताओं की नियुक्ति नहीं करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि सीबीआई अदालत के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देगी।
यही नहीं उन्होंने कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ चल रहे केसों में भी सरकार की ओर से कार्रवाई की मांग की।
राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान बादल के साथ भाजपा नेताओं में शहनवाज हुसैन, मेनका गांधी, शिवसेना नेता चंद्रकांत खाड़े, सपा नेता नीरज शेखर के अलावा टीएमसी, बीजू जनता दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा के अलावा कई अकाली नेता मौजूद थे।