फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

JNU: राजनाथ के दावे पर विपक्ष ने मांगे सबूत

विज्ञापन
विज्ञापन
जेएनयू में भारत और आतंकी अफजल गुरू की फांसी के विरोध की गई नारेबाजी के पीछे आतंकी हाफिज सईद का हाथ होने संबंधी गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। माकपा ने जहां बेहद तल्ख शब्दों में कहा है कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले धर्मनिरपेक्ष दलों को देशप्रेम का पाठ न पढ़ाए।
विज्ञापन


वहीं जदयू ने पूछा है कि क्या भाजपा अफजल गुरू की फांसी का सार्वजनिक विरोध करने वाली पीडीपी के साथ जम्मू-कश्मीर में सरकार नहीं बनाएगी?

इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने इस मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर आतंकी हाफिज सईद की भाषा बोलने और देश के साथ-साथ संविधान को अपमानित करने का आरोप लगाया।

गांधी को मारने वाले न दें हमें नसीहत: माकपा

माकपा महासचिव ने गृह मंत्री के दावे पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता की हत्या करने वाले धर्मनिरपेक्ष दलों को राष्ट्रविरोधी बता रहे हैं। उन्होंने गृह मंत्री को इस घटना के पीछे हाफिज सईद का हाथ होने संबंधी सबूत पेश करने की चुनौती दी।

उन्होंने कहा कि अगर किसी ने भारत के विरोध में नारेबाजी की है और सरकार के पास इसके सबूत हैं तो निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। मगर इसके बहाने प्रगतिशील, सांस्कृतिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्योंपर हमले नहीं किए जाने चाहिए।

इस मामले में माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने गृह मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और उन्हें संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संबंधी दिए गए अधिकार को ठीक से पढ़ने की नसीहत दी।
विज्ञापन

जदयू ने भी इस मामले में की बेहद तल्ख टिप्पणी

जदयू ने भी इस मामले में बेहद तल्ख टिप्पणी की। पार्टी महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि अफजल को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा दी थी। इस फैसले का विरोध करना उचित नहीं है और ना ही जदयू ने कभी ऐसा किया ही है।

मगर सवाल यह है कि फांसी के विरोध में नारेबाजी करने वालों को राष्ट्रद्रोही बता रही भाजपा और सरकार इस संबंध में पीडीपी के रुख से अनजान बनी क्यों फिर रही है।

पीडीपी ने ही अफजल की फांसी का सबसे तीखा विरोध किया था, मगर भाजपा ने न केवल इस पार्टी के साथ सरकार बनाई, बल्कि सबसे पहले विरोध करने वाली महबूबा मुफ्ती के साथ फिर हाथ मिलाने के लिए तैयार है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इस मामले में दोहरा मापदंड अपनाने से बचने के लिए पीडीपी के साथ सरकार नहीं बनाएंगे। इसके अलावा क्या इस मामले में पीडीपी को फिर से अपना रुख साफ करने के लिए कहेंगे?
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें