मुश्किल घड़ी में यूपीए की संकट मोचक बनने वाली सपा और बसपा पर अब सरकार की ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों की भी नजर है। विपक्षी दलों को उम्मीद नहीं है कि सपा, बसपा सरकार के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगी।
लिहाजा, भाजपा और माकपा ने दोनों पार्टियों को रिटेल में एफडीआई के मसले पर सरकार की घेरेबंदी में शरीक होने को बाध्य करने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। विपक्ष सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की बजाय एफडीआई पर वोटिंग के दांव को आगे रखना चाहता है।
रिटेल में एफडीआई के सवाल पर सपा और बसपा ने अभी तक पत्ते नहीं खोले है। दोनों पार्टियों ने संसद के अंदर इस मसले पर यूपीए सरकार के साथ जाने या विरोध करने के सवाल पर चुप्पी साध रखी है। दोनों दल रिटेल में एफडीआई के खिलाफ बात कर रहे हैं, लेकिन यूपीए सरकार को खतरे में डालने के पक्ष में भी नहीं लग रहे हैं।
लिहाजा, माकपा और भाजपा ने अब एफडीआई के मसले पर वोटिंग पर जोर देकर सपा और बसपा को सरकार के खिलाफ जाने के लिए मजबूत करने की रणनीति बनाई है। एफडीआई के फैसले पर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव माकपा महासचिव प्रकाश करात के साथ दिल्ली के जंतर मंतर पर यूपीए सरकार के खिलाफ ताल ठोक चुके हैं।
सपा देशव्यापी आंदोलन में भी शामिल हुई थी। माकपा सपा के इसी रुख का फायदा उठाने के पक्ष में है। उधर, बसपा ने तो रिटेल में एफडीआई का खुलकर विरोध तक नहीं किया है। मायावती ने इसके विरोध की बात तो कही है लेकिन वह यह भी कह चुकी है कि यूपीए सरकार को इसे किसानों के हित में साबित करना चाहिए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कुछ इसी तरह की बात कह चुके हैं।