7 फरवरी 2015 को दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले सर्वे एजेंसियों ने अपने अनुमानित चुनावी नतीजे देने शुरू कर दिए हैं। इंडिया टीवी-सी वोटर, इंडिया टुडे-सिसेरो और एबीपी-नेलसन ने इस चुनाव को लेकर जो नतीजे रहने की संभावना जताई है वह काफी हद तक एक से ही हैं। आइए जानते हैं इन ओपिनियन पोल में किस पार्टी को मिल सकती हैं कितनी सीटें।
इंडिया टीवी-सी वोटर ओपिनियन पोल
इनके अनुसार इस बार के चुनाव में बीजेपी को 35 सीटें मिलने की संभावना है, जो 2013 के मुकाबले 4 अधिक है। वहीं केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को भी 29 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। 2013 में आप को 28 सीटें मिली थीं।
इस ओपिनियन पोल के हिसाब से इस बार भी कांग्रेस की हालत खराब ही रहने वाली है, बल्कि इस बार 2013 की तुलना में और भी कम सीटें मिल सकती हैं। इसके अनुसार इस बार कांग्रेस को 5 सीटें मिल सकती हैं, जो 2013 से 3 कम है। वहीं अन्य को सिर्फ 1 सीट मिलने की उम्मीद है, जबकि 2013 में अन्य को 3 सीटें मिली थीं।
इंडिया टुडे ग्रुप और सिसेरो का ओपिनियन पोल
इसके ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी को 34 से 40 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर 'आप' को 25 से 31 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इस बार के चुनाव में भी कांग्रेस के बुरी तरह से पिटने की संभावना है। इस ओपिनियन पोल के अनुसार कांग्रेस 3 से 5 सीटों में ही सिमट सकती है।
अगर बात प्रतिशत में की जाए तो इस बार बीजेपी को 40 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। वहीं दूसरी ओर आप को 36 फीसदी और कांग्रेस को 16 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
आपको बता दें कि यह सर्वे 2 जनवरी से 6 जनवरी के बीच दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों के 210 पोलिंग बूथ इलाकों में करवाया गया है। इस सर्वे में 36 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार के काम को उम्मीद से अच्छा बताया है।
एबीपी-नीलसन का ओपिनियन पोल
एबीपी-नीलसन के ओपिनियन पोल के अनुसार बीजेपी को 34 सीटें मिलने की संभावना है, जो बहुमत से 2 सीट कम है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को इस बार भी 2013 के चुनावों जितनी सीटें ही मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। आपको बता दें कि पिछली बार आम आदमी पार्टी को 28 सीटें मिली थीं।
कांग्रेस का हाल इस बार भी बुरा ही रहने वाला है, जो अधिक से अधिक 8 सीटें जीत पाएगी। पिछली बार भी कांग्रेस को 8 सीटें ही मिली थीं। इस ओपिनियन पोल के मुताबिक अन्य को इस बार के चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलने की उम्मीद है, जबकि पिछली बार 3 सीटें अन्य के खाते में गई थीं।