जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर समस्या का एक ही संभावित समाधान यह हो सकता है कि ऐसे हालात बनाएं जाएं जहां सीमा हो भी लेकिन अप्रासंगिक हो।
उमर ने यह बात पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार को पिछले महीने दिल्ली में दिए एक इंटरव्यू में कही थी। दो पेज का यह इंटरव्यू डेली टाइम्स ने प्रकाशित किया है।
मेहर हाल ही में केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी दिवंगत सुनंदा पुष्कर के साथ ट्वीट वार को लेकर सुर्खियों में रह चुकी हैं।
उमर ने अपने इंटरव्यू में कहा कि यदि पूर्व पाकिस्तानी तानाशाह परवेज मुशर्रफ 2007 में मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी के साथ नहीं उलझते तो बहुत संभव है कि दोनों देश इस विवाद के समाधान पर आगे कदम बढ़ाते।
उमर के हवाले से समाचार पत्र ने लिखा है ‘यदि आप ऐसे हालात बनाते हैं जिसमें सीमाएं तो वजूद में रहें लेकिन अप्रासंगिक रहे तो मुझे लगता है कि सिर्फ यही एक समाधान है। यदि आप इसे कश्मीर से शुरू करते हैं और फिर इसका विस्तार करें, यह हमारा दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र का व्यापक विचार है।’ उमर के हिसाब से यही एकमात्र रास्ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू और कश्मीर की समस्या 1947 से ही है और यह दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान के लिए मुशर्रफ द्वारा प्रस्तावित चार सूत्री फार्मूले से कुछ अवसर थे।
इसमें असैन्यकरण और सीमा रेखा के लचीलापन भी शामिल था। उमर ने कहा कि मुशर्रफ ने पहली बार पाकिस्तान के पहले के रुख से अलग हटकर कुछ प्रस्ताव सुझाए थे।