सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि करदाताओं के पैसों का राजनेताओं व सत्ताधारी दल के महिमामंडन पर खर्च नहीं किया जा सकता।
शीर्ष अदालत ने अखबार, टीवी, रेडियो और इंटरनेट पर जारी होने वाले सरकारी विज्ञापनों में सत्ताधारी दलों द्वारा नेताओं या प्रसिद्ध लोगों के फोटो छपवाने या प्रसारित करने पर पाबंदी लगा दी है।
हालांकि शीर्ष अदालत ने चुनाव से पहले सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाने से इनकार किया है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश केअलावा मीडिया में दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों में किसी और की तस्वीर नहीं होगी।
यहां तक कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों तक के फोटो अब सरकारी विज्ञापनों में नजर नहीं आएंगे।