'कार्तिक कॉलिंग कार्तिक' फिल्म की कहानी से मिलती-जुलती कहानी है बंगलुरु के आईपीएस अधिकारी की। यह अफसर खुद से ही बात करते हैं, वह खुद को पत्र लिखते हैं और खुद को ही जवाब देते हैं। लेकिन वो ये सब अनजाने में नहीं करते।
आईपीएस अधिकारी भास्कर राव पिछले 26 सालों से ऐसा कर रहे हैं। टीओआई के मुताबिक बंगलुरु के मग्राथ रोड ऑफिस से पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) आंतरिक सुरक्षा भास्कर राव, पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) भास्कर राव को एक पत्र लिखते हैं।
फिर वह कार्लटन हाउस ऑफिस पहुंचकर बतौर पुलिस महानिरीक्षक (प्रशक्षिण) इसी पत्र को रिसीव कर उसका जवाब देते हैं।
दरअसल, यहां स्टाफ की कमी के कारण एक व्यक्ति को दो अहम पदों का कार्यभार संभाल रहा है। इसी तरह आईपीएस अधिकारी भास्कर राव, आईजी (आंतिरक सुरक्षा) और आईजी (प्रशिक्षण) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
भास्कर राव का कहना है कि वह पुलिस विभाग की बेहतरी के लिए खुद को पत्र लिखते हैं। दो सरकारी अधिकारियों के बीच पत्राचार होना सामान्य है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी भी है।
भास्कर कहते हैं कि वे दो पद पर संभाल रहे हैं और इस तरह सबकुछ लिखित में रखकर सारी बातें स्पष्ट व पारदर्शी रखना चाहते हैं। मेरे बाद जो अधिकारी आएगा सबकुछ लिखित होने से उसे कोई दिक्कत नहीं होगी। वह खुद को सर्तक रखने के लिए भी ऐसा करता हैं।
एक व्यक्ति के दो पद संभालने के कारण जहां पारदर्शिता के लिए यह तरीका अपनाया जा रहा है, वहीं इससे कार्यभार भी बढ़ रहा है। एक अधिकारी के मुताबिक इस तरह की परिस्थितियों में काम करना भी मुश्किल होता है।
पुलिस महानिदेशक का कहना है कि पुलिस महानिरीक्षक के पद पर अधिकारियों की कमी है। कुछ अधिकारियों की अक्तूबर और नवंबर में सेवानिवृत्ति के बाद मुश्किल और बढ़ सकती है।