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एक ‘पागल’ से हारे सरकार के दिग्गज वकील

Thu, 01 Aug 2013 12:03 AM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
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पागल करार देकर नौकरी से निकाले गए एक आईएएस अधिकारी ने अपने अधिकार की कानूनी लड़ाई में भारत सरकार के दिग्गज वकीलों की छुट्टी कर दी।
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सर्वोच्च अदालत ने पूर्व अधिकारी की दलीलों को गौर करने के बाद कहा कि अगर मान भी लिया जाए कि अधिकारी पागल था, तब भी उसे नौकरी से नहीं निकाला जा सकता था।

1977 बैच के आईएएस अनिल कुमार महाजन को पागल करार देकर हटाए जाने से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का दबाव बनाया गया था।

आईएएस को सरकार की ओर से गठित किए गए मेडिकल बोर्ड ने अपने समक्ष पेश न होने पर पागल करार दिया था।

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट में दिमागी रूप से संतुलित न होने के आधार पर उन्हें याचिका वापस लेने को भी मजबूर किया गया। लेकिन हक हासिल करने के जुझारुपन से आखिर उसे सुप्रीम कोर्ट में जीत मिली।
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जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय ने सरकार और महाजन के पक्ष पर गौर करने के बाद कहा, ‘यदि यह मान भी लिया जाए कि अधिकारी पागल हो गया था। तब भी सरकार उसे व्यक्तिगत विकलांगता (समान अधिकार, अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम-1995 को ध्यान में रखते हुए सेवाओं से मुक्त नहीं कर सकती।’

पीठ ने अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि 1995 के इस कानून में उन लोगों को संरक्षण प्रदान किया गया है जिनके साथ सेवाओं के दौरान अक्षमता की वजह से भेदभाव होता था और उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता था या फिर उनकी रैंक को कम कर दिया जाता था।

कानून के तहत ऐसे व्यक्ति को अक्षमता के आधार पर प्रमोशन देने से इंकार करना भी प्रतिबंधित है।

अदालत ने जोर दिया कि महाजन 1977 में आईएएस अधिकारी के तौर पर सेवा में आए और उन्होंने पागल घोषित किए जाने से पहले तक 30 साल अपनी सेवाएं दी।

अब उनकी सेवानिवृत्ति की उम्र पार हो चुकी है। इसलिए अदालत सरकार को विभागीय कार्यवाही की शुरुआत से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने तक उन्हें पूरा वेतन दिए जाने का आदेश जारी करती है।

इंसाफ के लिए लंबा संघर्ष
अनिल कुमार महाजन को कई क्रम में जारी किए गए निलंबन के आदेशों के बाद पागल घोषित किया गया और फिर 15 अक्टूबर, 2007 को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश जारी कर दिया गया। उन्हें केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्युनल (कैट) से भी कोई राहत नहीं मिली।

हाईकोर्ट ने भी उसके मामले को इस आधार पर नहीं गौर किया, क्योंकि कानूनी लड़ाई लड़ने में उसे अक्षम मान लिया। आखिर में महाजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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‘जांच अधिकारी ने यदि उसे पागल करार दिया और विकलांगता अधिनियम की धारा 2 (आई) के तहत सेवाएं प्रदान के दौरान मानसिक अक्षमता आती है, जिसकी धारा 47 के तहत किसी को इस आधार पर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता या उसकी रैंक को कम किया जाए।’--जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय
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