ताज कॉरीडोर मामले में अदालती फैसले ने बसपा सुप्रीमो मायावती को ऐसी राहत दे दी है जिसके बूते अब वह अपनी विरोधी पार्टियों को भ्रष्टाचार के सवाल पर ज्यादा आसानी से घेर सकती हैं। यही नहीं अब वे अपनी पार्टी को आने वाले लोकसभा चुनाव में भी दुगने उत्साह से उतारने की तैयारी करेंगी।
मायावती के लिए राजनीतिक संघर्ष यात्रा में ताज कॉरीडोर पर आया फैसला अहम पड़ाव है। वे इस मामले को लेकर पिछले एक दशक से संघर्ष करती रही हैं। इसी मुद्दे पर वर्ष 2003 में बसपा ने भाजपा से दोस्ती तोड़कर अपनी गठबंधन सरकार खुद ही छोड़ दी। उस वक्त मायावती ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि वह केंद्र में अपनी सरकार के बूते ताज कॉरीडोर मामले में सीबीआई के जरिए दबाव बनाना चाहती है ताकि बसपा मजबूरीवश भाजपा से 2004 के लोकसभा चुनाव में गठजोड़ कर ले। उसके बाद से भाजपा व बसपा फिर नहीं मिले।
इस दौरान यह मामला विरोधी पार्टियां जरूर उछालती रहीं। लेकिन हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद बसपा अब खासी उत्साहित दिखती है। मायावती अब जनता को बताएंगी कि किस तरह विरोधी दलों ने साजिश कर उन्हें झूठे मामले में फंसाया। इस मामले में भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस व सपा भी शामिल हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि अदालती मामले से छुटकारा मिलने के बाद पार्टी अध्यक्ष अब पूरा वक्त पार्टी को आगे बढ़ाने में लगा पाएंगी।