घरेलू कलह और अपनों की उपेक्षा से एक बुजुर्ग इस कदर टूट गया कि उसने घर में ही खुद की चिता सजाई और खुद को आग के हवाले कर दिया। कुछ ही देर में आग की लपटों के बीच उसका जिस्म कोयला हो गया। जब तक घटना का पता चला, परिवार का यह मुखिया दुनिया छोड़ चुका था। घटना की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन खानापूरी कर लौट आई। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रैदासपुरी मोहल्ले में शुक्रवार की रात दिल दहलाने वाली वारदात हुई। जिसने भी सुना, रौंगटे खड़े हो गए।
घरेलू विवाद और बेटों की बेरुखी ने 60 साल के एक बुजुर्ग को ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया, जिसकी कल्पना भी नहीं जा सकती। रात का डेढ़ बज चुका था। पूरा मोहल्ला गहरी नींद में सोया था। बुजुर्ग घर की दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में पहुंचा और लकड़ियों की इत्मिनान से चिता सजाई। बेटे और बहू नीचे के कमरों में सो चुके थे। वह खुद ही चिता पर बैठा और मिट्टी का तेल डालकर लकड़ियों में आग लगा ली।
देखते ही देखते चिता धू-धू कर जलने लगी। बुजुर्ग के चीखने-चिल्लाने की आवाज भी किसी को सुनाई नहीं पड़ी। आग भड़की और हवा में दुर्गंध फैली तो आसपास के लोगों को नींद खुल गई। सामने देखा तो छत पर आग लगी देखी। लोग घटनास्थल की ओर दौड़े, देखा तो बुजुर्ग की चिता जल रही थी। लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक सब कुछ राख हो चुका था। सूचना पर सिविल लाइन पुलिस भी मौके पर पहुंची।
पत्नी की मौत ने बुजुर्ग को झकझोर दिया था
मृतक के बेटों से पूछताछ की और खानापूरी कर लौट आई। बाद में परिजनों ने बुजुर्ग के अवशेषों का अंतिम संस्कार कर दिया। पूरी घटना को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। बताया गया है कि 15 बरस पहले पत्नी की मौत ने बुजुर्ग को झकझोर दिया था, फिर भी वह परिवार की खुशियों के लिए काम करता रहा। बेटों की शादियां कर दी गईं।
अचानक परिस्थितियां बदलीं और पिछले पांच माह से वह परेशान रहने लगा। उसने एसएसपी कार्यालय और सिविल लाइन थाने में प्रार्थना-पत्र देकर प्रताड़ना की शिकायत की थी। पुलिस आठ दिन पहले उसके घर पहुंची थी, लेकिन पूछताछ कर लौट आई। घटना के बारे में सिविल लाइन थाना प्रभारी चंद्रकिरण यादव से बात की गई तो उन्होंने अलग ही थ्योरी बताई। बकौल यादव, मोमबत्ती बिस्तर पर गिर गई होगी, जिससे बुजुर्ग की आग लगने से मौत हो गई। पुलिस के आला अफसरों को तो घटना की जानकारी ही नहीं दी गई।
बुजुर्ग रिश्ते और नातों की उपेक्षा से मायूस था। कल ही उसकी बहन की भी लंबी बीमारी के बाद मौत होने की खबर आई थी। यह भी जानकारी मिली है कि वह गुमसुम था और ऊपर के कमरे में अकेला ही रहता था। चिता के लिए उसने तीन दिन पहले से ही लकड़ियां जुटानी शुरू कर दी थीं। पिछले कई दिन से उसने जो ठान रखा था, शुक्रवार रात उसे पूरा कर दिया।