आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन का मामला अभी थमा भी नहीं था कि एक और अधिकारी राजनीति की भेंट चढ़ गया। आरोप है कि पेट्रोलियम मंत्री के रिलायंस इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाने का विरोध करने पर मंत्रालय के संयुक्त सचिव का तबादला कर दिया गया।
टीओआई की खबर के मुताबिक भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वरिष्ठ नेता गुरुदास दासगुप्ता ने संयुक्त सचिव गिरिधर अरमाणे के तबादले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है।
दासगुप्ता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि गिरिधर ने पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली को रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड को लाभ पहुंचाने का विरोध किया था। इस कारण उनका तबादला कर दिया गया।
भाकपा नेता ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि पेट्रोलियम मंत्रालय को आदेश देकर इस द्वेषपूर्ण आदेश को खारिज किया जाए।
पिछले बुधवार से गिरिधर अरमाणे के कार्यों में बदलाव कर दिया गया है। अब वह ओएनजीसी विदेश लिमिटेड और गैस की कीमतों से जुड़े मामलों की देखरेख नहीं कर सकेंगे। इन कार्यों की जिम्मेदारी मंत्रालय में ही अन्य संयुक्त सचिव पीके सिंह को सौंपी गई है।
'बेहतर तालमेल के लिए किया तबादला'
वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय ने गुरूदास दासगुप्ता के इन आरोपों से इंकार कर दिया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अगर मंत्रालय के कोई गलत इरादे होते तो गैस कीमतों के तय होने से पहले ही गिरिधर अरमाणे को उनसे अलग कर दिया जाता। अब गैस की कीमतें तय की जा चुकी हैं और कैबिनेट ने भी इसे मंजूर कर लिया है। तबादला बेहतर तालमेल लाने के लिए किया गया है।
'पेट्रोलियम मंत्री कर रहे धोखाधड़ी'
गुरुदास दासगुप्ता ने अरमाणे के तबादले को लेकर कहा कि पेट्रोलियम मंत्री धोखाधड़ी से कुछ कम नहीं कर रहे हैं।
दासगुप्ता ने कहा कि अरमाणे को हाल ही में संयुक्त सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया था। अब नया अधिकारी केवल मंत्री के आदेशों को आगे बढ़ाएगा न की अपने स्वतंत्र विचार रखेगा।
भाकपा नेता ने दुर्गाशक्ति नागपाल के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि ईमानदार अधिकारी सरकार द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे हैं।