अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक बार फिर भारत में धार्मिक असहिष्णुता का जिक्र किया है। ओबामा ने कहा है कि पिछले कुछ साल में देश के हर धर्म के लोगों को जिस तरह की धार्मिक असहिष्णुता का सामना करना पड़ा है उसे देख कर महात्मा गांधी को भारी सदमा लगता।
ओबामा का यह बयान व्हाइट हाउस की ओर से भारत में उनके दिए गए विदाई भाषण पर सफाई देने के एक दिन बाद ही आया है। ओबामा ने इस भाषण में भारत की मजबूती के लिए धार्मिक सहिष्णुता बनाए रखने पर जोर दिया था। व्हाइट हाउस ने कहा था कि ओबामा की मोदी सरकार की नीतियों पर नहीं थी।
हाई प्रोफाइल नेशनल प्रेयर-ब्रेकफास्ट में ओबामा ने भारत में धार्मिक असहिष्णुता का जिक्र करते हुए कहा, ‘हाल ही मैं मिशेल के साथ भारत यात्रा से लौटा हूं। भरपूर सौंदर्य लिए इस अद्भुत देश में जबरदस्त विविधता है लेकिन पिछले कुछ सालों के दौरान यहां हर धर्म के मानने वालों को दूसरे धर्मों की असहिष्णुता का शिकार बनना पड़ा है।
धर्म के नाम पर हिंसा पर जताई चिंता
उन्हें सिर्फ अपनी धार्मिक विरासत और विश्वास की वजह से यह सब सहना पड़ा है। इस देश में धार्मिक असहिष्णुता जिस स्तर पर पहुंच चुकी है, उसे देख कर इसके राष्ट्रपिता महात्मा गांधी गहरे सदमे में डूब जाते।’
उन्होंने हिंसा के जिम्मेदार किसी खास धर्म के नाम तो नहीं लिया लेकिन धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा नई बात नहीं है।
ओबामा ने नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट में मौजूद 3000 अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय नेताओं के बीच बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता का जिक्र करते हुए कहा कि मानवता अपने अब तक के इतिहास में इस तरह की समस्या का सामना करती रही है। यह नहीं कहा जा सकता है कि इस तरह की हिंसा हमारे यहां नहीं कहीं और होती है।
नफरत के खिलाफ
ईसा मसीह के नाम पर भी लोगों के खिलाफ भयंकर हिंसा हुई है। हमारे देश में भी ईसा मसीह के नाम गुलामी और नस्लीय भेदभाव का एक दौर रहा है। ओबामा ने कहा कि हम सब में पाप की प्रवृति होती है जोे हमें पथभ्रष्ट कर सकती है। आज नफरत फैलाने वाले धार्मिक समुदाय ट्विटर अकाउंट से लैस हैं।
साइबर स्पेस के छिपे हुए कोनों से धार्मिक उन्माद फैलाया जा रहा। ऐसे में धार्मिक उन्माद का मुकाबला पहले से मुश्किल हो गया है। लेकिन ईश्वर हम इस मुकाबले के लिए बाध्य करते हैं। और मेरा मानना है कि इस मिशन में हमारे कुछ सिद्धांत पथ प्रदर्शक हो सकते हैं। ये वो सिद्धांत हैं, जिन पर हम विश्वास करते हैं।
आज नफरत फैलाने वाले धार्मिक समुदाय ट्विटर अकाउंट से लैस हैं और साइबर स्पेस के छिपे हुए कोनों से धार्मिक उन्माद फैलाया जा रहा। ऐसे में धार्मिक उन्माद का मुकाबला पहले से मुश्किल हो गया है। लेकिन ईश्वर हमें इस असहिष्णुता का मुकाबला करने के लिए बाध्य करते हैं। इस मिशन में हमारे कुछ सिद्धांत पथ प्रदर्शक हो सकते हैं। ये वो सिद्धांत हैं, जिन पर हम विश्वास करते हैं।