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मोदी सरकार ने रोका ये अहम सर्वे, बदनामी का था डर

Mon, 23 Nov 2015 03:38 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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बावजूद की स्वच्छ भारत मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। उसके लिए साल भर के भीतर ही करोड़ से ज्यादा शौचालय बनवा दिए गए हों लेकिन आज भी लोगों की आदत में कोई खास बदलाव नहीं आया है।
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हाल ही में स्वच्छ भारत अभियान को और भी बुलंदी देने के लिए सेस लगाया गया है लेकिन इसका कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है। आज भी लोग शौचालय का इस्तेमाल कम करते हैं। इसका खुलासा नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के द्वारा किए गए सर्वे में हुआ है जो पूरे भारत किया गया है।

स्वच्छ भारत मिशन के अतंर्गत बनवाए गए शौचालयों के इस्तेमाल का आंकलन करने के लिए किए गए इस सर्वे के मुताबिक कुल बनवाए गए शौचालयों में से आधे का भी इस्तेमाल नहीं किया गया है।
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रोक लिया गया सर्वे

सर्वे के अनुसार गांवों में बनवाए गए 95 लाख शौचालयों में से केवल 46 प्रतिशत शौचलय इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। वहीं शहर में बनवाए गए शौचालयों के उपयोग किए जाने का यही हाल यहां केवल 50 प्रतिशत का ही उपयोग किया गया है।

इतना ही नहीं सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनवाए गए शौचालयों का इस्तेमाल घर के स्टोर रूम के रुप में किया दा रहा है। मसलन उनमें आनाज रखे जा रहे हैं।

शौचालय बनवाए जाने के बाद भी लोग अल-सुबह उठ कर शौच करने जाते हैं। लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ क्षेत्रों में बनवाए गए शौचालयों का उपयोग 1000 प्रतिशत तक किया गया है।

हालांकि की अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार एनएसएसओ के इस सर्वे को बीते 2 अक्टूबर को जारी किया जाना था लेकिन पीएमओ के रिव्यू के बाद इस रिपोर्ट को रोक लिया गया।

इस सर्वे में शामिल अधिकारियों के मुताबिक पीएमओ ने इसे इसलिए रोक लिया क्योंकि इससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने के लिए मौका मिल जाता।
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