आतंकवाद के मुख्य एजेंडे के साथ भारत और पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की बातचीत इस महीने की 23- 24 तारीख को होगी।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने बृहस्पतिवार को भारत की ओर से प्रस्तावित इन तारीखों पर हामी भर कर बातचीत पर बनी असमंजस की स्थिति को खत्म कर दिया है।
गुरदासपुर, उधमपुर के ताजा आतंकी हमले और सीमा पर चल रही लगातार फायरिंग के बावजूद दोनों पक्षों की बातचीत को कईलिहाज से अहम माना जा रहा है। कश्मीर इस बातचीत के एजेंडे में शामिल नहीं है।
करेंगे ठोस रास्ता तैयार
पाकिस्तान की ओर से हामी का संकेत मिलते ही एनएसए
अजीत दोभाल ने गृहसचिव, विदेश सचिव, रक्षा सचिव और खुफिया विभाग आईबी व रॉ
के प्रमुखों के साथ बैठक कर बातचीत का ब्लू प्रिंट तैयार करना शुरू किया
है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने देर शाम तक अजीज की भारत यात्रा की पुष्टि
नहीं की थी।
पिछले महीने रुस के उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और
उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के साझा बयान में इस बातचीत की घोषणा की
गई थी। उसी दौरान दोनों पक्षों ने फैसला लिया था कि विश्वास बहाली के मकसद
से सबसे पहले दोनों देशों के एनएसए आतंकवाद के मुद्दे पर बातचीत कर आगे का
ठोस रास्ता तैयार करेंगे।
दोभाल-अजीज बातचीत सकारात्मक रहती है तो आने वाले
दिनों में दोनों देशों के महानिदेशक मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) और बीएसएफ
और पाकिस्तान रेंजर्स के महानिदेशकों की मुलाकात होगी।
संवेदनशील मुद्दों से दूर
उच्चपदस्थ सरकारी
सूत्रों के मुताबिक उफा में हुए फैसलों के मुताबिक सीमा पर शांति बरकरार
रखने की जिम्मेदारी दोनों डीजीएमओ और बीएसएफ व पाक रेंजर्स को दी जाएगी।
सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि अगले साल पाकिस्तान में होने वाले सार्क
सम्मेलन में मोदी शिरकत करेंगे। इस मौके पर मोदी और नवाज शरीफ ऐतिहासिक कदम
उठाने का मन बना चुके हैं।
लिहाजा उससे पहले दोनों पक्ष सभी विवादित
मुद्दों पर व्यवहारिक नतीजे पर पहुंचने की कोशिश में हैं। सूत्रों के
मुताबिक यही वजह है कि कश्मीर और सियाचिन जैसे संवेदनशील मुद्दों को इन
मुलाकातों के एजेंडे से दूर रखा गया है।
सौंपे जाएंगे सबूत
सूत्रों के मुताबिक सार्क सम्मेलन
से पहले बैक चैनल और ट्रेक-2 के जरिए कश्मीर पर ठोस बातचीत की जमीन तैयार
करने की योजना है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई को सहमत करना दोनों पक्षों के
लिए अहम चुनौती है।
सूत्रों ने बताया कि भारत गुरदासपुर और उधमपुर के
आतंकी हमले में मिले पाकिस्तानी हाथ के सभी सबूत अजीज को सौंपे जाएंगे। साथ
ही पाकिस्तान में रह रहे भारतीय आरोपियों से संबंधित पुराने डोजियर को भी
ताजा शक्ल दी जा रही है।
इसके अलावा भारत 26/11 के आरोपियों को जेल में
रखने का मामला भी विश्वास बहाली के मुख्य शर्त के तौर पर उठाएगा। सूत्रों
के मुताबिक पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी संगठन लश्कर और जैश के
कैंपों और सीमा पार आतंकवाद पर भी ठोस बातचीत होगी।
सूत्रों ने बताया कि
अपनी सेना के दबाव में सरताज अजीज भी बलूचिस्तान और कराची में कथित तौर पर
भारतीय एजेंसियों की मौजूदगी का मुद्दा उठाएगा।
इससे अलावा समझौता
एक्सप्रेस धमाका मामले में आरोपियों की जमानत को चुनौती नहीं देने के एनआईए
के फैसले को भी पाकिस्तान गंभीर मोड़ दे सकता है। भारत को दबाव में रखने
का मकसद के पाक सीमा में कथित भारतीय ड्रोन की मौजूदगी को भी मुद्दा बना
सकता है।