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अगर लीक न हुई होती ये जानकारी तो मर चुका होता दाऊद

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अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को विदेशी जमीन पर मारने के लिए वर्ष 2005 में व्यापक योजना बनी थी। यह योजना वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के नेतृत्व में परवान चढ़ रही थी। डोभाल उस साल जनवरी में ही खुफिया एजेंसी आईबी के निदेशक पद से रिटायर हुए थे।
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दिल्ली में इस योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा था उसी वक्त मुंबई पुलिस में शामिल डी कंपनी के खबरियों ने खेल बिगाड़ दिया। इस योजना का अंत काफी नाटकीय ढंग से हुआ जिसमें दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी मानी जाती है।

पूर्व गृह सचिव और भाजपा सांसद आरके सिंह ने दाऊद के खात्मे की इस योजना को बिगाड़ने में मुंबई पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों के रोल की तरफ इशारा किया है। अब महाराष्ट्र सरकार इसकी जांच करवा रही है।
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उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों ने बताया कि उस वक्त योजना के नाटकीय अंत के बाद दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने अति गोपनीय तार वाशिंगटन भेजा था जिसमें पूरी घटना का ब्योरा था।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय एजेंसी ने छोटा राजन गैंग के विक्की मल्होत्रा और फरीद तनाशा नाम के दो गैंगेस्टर को दाऊद के खात्मे के लिए खास ट्रेनिंग दी थी। फैसला हुआ था कि दाऊद की बेटी की दुबई में हो रही शादी के दौरान मौका देखकर योजना को अंजाम दिया जाए। दुबई में इनकी मदद के लिए एजेंसी ने अपने तंत्र तैयार कर लिए थे।

मौजूद डोभाल गुस्सा हो उठे

डोभाल विक्की और फरीद के साथ दिल्ली के पांच सितारा हयात होटल में जिस दिन योजना को अंतिम रूप दे रहे थे। उसी दिन मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच के डीसीपी धनंजय कमलाकर दिल्ली पहुंचे। सूत्रों ने बताया कि मुंबई पुलिस की खुफिया ब्रांच से यह सूचना चली कि छोटा राजन गैंग के दो आदमी दिल्ली में है।

दरअसल इन्हें भनक लग गई थी कि दिल्ली में दाऊद को लेकर कुछ खिचड़ी पक रही है। कमलाकर ने दिल्ली पुलिस के एक एसीपी की मदद से विक्की और फरीद का ठिकाना ढूंढ निकाला। कमलाकर ने हयात पहुंच कर दोनों की गिरफ्तारी का दावा ठोंक दिया।

सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के एसीपी ने दिल्ली के एक अखबार को भी खबर कर दी थी। उस अखबार के फोटोग्राफर और पत्रकार हयात पहुंच गए। सूत्रों के मुताबिक यह सब देखकर वहां मौजूद डोभाल गुस्सा हो उठे।

कमलाकर नहीं माना और डोभाल भी उस नाजुक मौके पर कुछ नहीं कर सके। तब तक इस अति गोपनीय योजना का पूरा प्लाट बिगड़ चुका था। डीसीपी कमलाकर ने विक्की और फरीद को गिरफ्तार कर लिया और दाऊद को खत्म करने की महीनों से चल रही पूरी योजना पर पानी फिर गया।
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भनक मुंबई पुलिस को कैसे लगी

एजेंसी में इस घटना के बाद अंदरखाने मचे बवाल पर मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर एएन राय ने जांच शुरू की। उस अंदरूनी जांच में मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर असलम मोमिन का नाम सामने आया।

मोमिन के कॉल रिकॉर्ड ने उसके डी-कंपनी के साथ संपर्क का राज खोल दिया। मोमिन को निलंबित कर दिया गया लेकिन डीसीपी कमलाकर सुरक्षित रहे।

सूत्रों ने बताया कि यह आज तक राज बना हुआ है कि आखिर दिल्ली में बनी इस अति गोपनीय योजना की भनक मुंबई पुलिस को कैसे लगी।

सूत्रों का मानना है कि कुछ कद्दावर लोगों को बचाने के लिए पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस घटना ने इतने साल बाद भी दाऊद की भारतीय तंत्र में पहुंच को भी खोल कर रख दिया।
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