सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को ऑनलाइन और पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान करने का अधिकार प्रदान करने की मांग पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया। याचिका में कहा गया है कि हर एनआरआई के लिए यह संभव नहीं कि वह चुनाव के दौरान देश आकर मतदान करे। इसलिए उसे मतदान करने का अधिकार प्रदान करने के लिए ऑनलाइन और पोस्टल बैलेट की सुविधा दी जानी चाहिए।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने ब्रिटेन में रहने वाले एनआरआई नागेंद्र चिंदम व अन्य की याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता उर्मिला सिरूर ने तर्क दिया कि सर्वोच्च अदालत ने एक दशक पूर्व अपने फैसलों में मतदान को हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार करार दिया था।
अदालत ने कहा था कि यह नागरिकों को मिले मूल अधिकार का ही एक पहलू है। अधिवक्ता ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में 2010 में संशोधन किया गया था, जिसमें यह साफ किया गया था कि जिस नागरिक का नाम निर्वाचन सूची में शामिल है और जो भारत के सिवा अन्य किसी देश की नागरिकता नहीं रखता, उसे अपने निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का अधिकार है।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि विदेश में रहने वाले भारतीयों को इसके तहत चुनाव के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र पहुंचकर मतदान का अधिकार तो है, लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं कि हर एनआरआई विदेश से मतदान के लिए आ सके।
ऐसे में मतदान के अधिकार की महत्ता को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन और पोस्टल बैलेट के जरिए विदेश में रहने वाले भारतीय को यह हक मिलना चाहिए। पीठ ने अधिवक्ता के तर्कों से सहमति जताते हुए सरकार व आयोग से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।