उत्तर प्रदेश कांग्रेस में बड़े बदलाव को अंतिम रूप देते ही अब अखिल भारतीय कांग्रेस में भी फेरबदल की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
जनवरी में उपाध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद से राहुल की नई टीम बनना है। जबकि उनके कुछ समय बाद ही भाजपा के अध्यक्ष बनने वाले राजनाथ सिंह ने न सिर्फ अपनी टीम बना ली है, बल्कि इसके सदस्यों को काम भी सौंप दिया है।
दूसरी तरफ राहुल की नई टीम नए और पुराने चेहरों के हेर फेर में फंसी हुई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के फेरबदल के साथ ही कांग्रेस नेता जल्द ही बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।
राहुल ने अपने संसदीय राज्य उत्तर प्रदेश के कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव किया है। यूपी में उन्होंने स्थानीय और युवा विधायकों को मौका दिया है। जबकि कई बड़े चेहरों को हटा दिया है।
सूत्रों का कहना है कि हटाए गए इन बड़े चेहरों को राहुल अपनी नई राष्ट्रीय टीम में शामिल कर सकते हैं। ये बड़े चेहरे राशिद मसूद, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, पीएल पुनिया, अनुग्रह नारायण आदि हैं।
दरअसल, राहुल गांधी के सामने युवा और बुजुर्ग नेता हैं। हालांकि राहुल कई बार कह चुके है कि वह वरिष्ठ नेताओं को साथ लेने में विश्वास करते हैं। मगर फिर भी पुराने और नए चेहरों के हेर फेर की वजह से राहुल की नई टीम में देरी हो रही है।
देरी को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पीसी चाको कहते है कि राहुल सभी नेताओं से मिल रहे हैं। वह राज्यों का दौरा कर रहे हैं। वह मीडिया की तरह जल्दबाजी में नहीं है।
उपाध्यक्ष बनने के बाद अभी तक जितनी भी नियुक्ति हुई है। उनमें से ज्यादातर मामलों में उन्होंने 30 से 45 उम्र वर्ग के लोगों को नई जिम्मेदारी सौंपी है। यह आयु वर्ग राजनीति में युवा कहलाता है।
बिहार में अशोक चौधरी, झारखंड के सुखदेव भगत, पंजाब में प्रताप सिंह बाजवा, उड़ीसा से जयदेव जेना जैसे नेता प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं। वह सभी इसी आयु वर्ग के हैं। ऐसे में उनकी राष्ट्रीय टीम में भी युवाओं को तरजीह मिलना तय माना जा रहा है।
वैसे भी पार्टी की प्रमुख गतिविधियों में राहुल के करीबी युवा ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं। कर्नाटक में विधायक दल के नेता चुनने में वरिष्ठ नेता और रक्षा मंत्री ए के एंटनी के साथ खासतौर से राहुल के करीबी जितेंद्र सिंह को भी भेजा गया।