जल्द ही हमें चुनावों में ईवीएम मशीनों से मतदान करने के बदले रसीद प्राप्त हो सकेगी। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग (ईवीएम) में वोट पुष्टि की रसीद का तंत्र विकसित कर ट्रायल किया गया है। मगर पारदर्शिता के लिए उठाए गए कदमों में और बेहतरी की जरूरत है। सर्वोच्च अदालत ने इसके लिए दो माह का समय प्रदान किया है।
जस्टिस पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आयोग ने विभिन्न राज्यों के चुनावों और उपचुनावों के दौरान ईवीएम मशीन में वोटर वैरीफिएबल ऑडिट ट्रायल सिस्टम (वीवीपीएटी) के प्रयोग से संबंधित रिपोर्ट सौंपी। 4 अक्टूबर, 2010 को सर्वदलीय बैठक में अतिरिक्त पारदर्शिता के लिए वोट पुष्टि करने की मांग की गई थी। इसके बाद से अब तक इस संबंध में दो सफल ट्रायल हो चुके हैं, लेकिन विस्तृत समीक्षा में पाया गया कि इसमें कुछ और सुधार की जरूरत है।
सर्वोच्च अदालत में हलफनामा दाखिल कर आयोग ने ट्रायल पर स्थिति रिपोर्ट पेश की है। इस मसले पर गत वर्ष 27 सितंबर को अदालत ने आदेश जारी किया था। पीठ के समक्ष जनता पार्टी के अध्यक्ष व याचिकाकर्ता सुब्रह्मणयम स्वामी ने कहा कि ईवीएम में वोट पुष्टि और कुछ तकनीकी बदलाव से पारदर्शिता आएगी।
वहीं पीठ ने वीवीपीएटी तंत्र को और बेहतर किए जाने के लिए आयोग को समय प्रदान करते हुए सुनवाई को 9 अप्रैल तक के लिए टाल दिया। स्वामी की ओर से ईवीएम मशीन में वोट पुष्टि की रसीद देने की व्यवस्था किए जाने की मांग वाली याचिका दायर की गई है।