ट्रेन के सफर में मुसाफिरों को हवाई यात्रा की कुछ सुख-सुविधाओं का अहसास कराने की तैयारी रेलवे ने कर ली है। रेलवे अब रिजर्व्ड यात्रियों को सीट ग्रहण करते ही डिस्पोजेबल कचरा थैली उपलब्ध कराएगा। मुसाफिरों को करना सिर्फ इतना होगा कि जो भी कूड़ा वह यात्रा के दौरान ट्रेन में फैलाते हैं उसे उन्हें इस पर्यावरण अनुकूल कचरा थैली में रखना होगा।
हवाई जहाज की तर्ज पर यात्रा के दौरान डिब्बे में ही मौजूद सफाई कर्मी बड़ा डस्टविन लेकर आएगा और इस थैली को इसमें डालने का अनुरोध करेगा। ट्रेनों को साफ सुथरा रखने के लिए रेल मंत्रालय गांधी जयंती के मौके पर दो अक्टूबर से यह अभियान शुरू करने जा रहा है।
मंत्रालय की ओर से इसे स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत अभियान का नाम दिया गया है। यही नहीं मंत्रालय ने कचरा थैलियों तो तैयार करने के आर्डर भी दे दिए हैं। खास बात यह है कि यात्रियों से इस थैली के लिए कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूले जाएंगे।
रेलवे यह प्रयोग अपनी ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग योजना के तहत शुरू करने जा रहा है। कचरा थैली पर यात्रियों के लिए निर्देश भी लिखे गए हैं। यही नहीं इस पर ओबीएचएस के बारे में भी बताया गया है। आग से सुरक्षा के उपायों के बारे में भी थैली में जानकारी दी गई है।
साथ ही यात्रियों से अपील की गई है कि वह कूड़े को इसी थैली में डालें और इसे ट्रेन में ही डस्टबिन में फेंके या फिर स्टेशन के डस्टबिन में।
कूड़ा एकत्र करने के लिए होंगे तीन प्रयोग
रेलवे यह जानता है कि कचरे के लिए यात्रियों को थैलियां देना उनके लिए गले की हड्डी भी बन सकता है। यही कारण है कि यात्रा के दौरान कूड़ा एकत्र करने के लिए तीन प्रयोग किए जाएंगे।
पहले प्रयोग में यात्रियों को कचरा थैली दे दी जाएगी और उनसे कूड़ा उसी में एकत्र करने को बोला जाएगा। अब देखा जाएगा कि यात्री इस थैली को ट्रेन में या स्टेशन पर रखे डस्टबिन में फेंकते हैं या नहीं।
दूसरे प्रयोग के तहत कचरा थैली दिए जाने के बाद ट्रेन में ओबीएचएस स्टाफ बड़ा सा डस्टबिन लेकर आएगा और उनसे यह थैली इस बिन में फेंकने को कहेगा। तीसरे प्रयोग में यात्री को यह थैली नहीं दी जाएगी सिर्फ स्टाफ बड़ा डस्टबिन ट्रेन में घुमाएगा और यात्रियों से अपना कूड़ा उसमें फेंकने का अनुरोध करेगा।
साथ ही अभी तक एसी 1,2,3 में सफर करने वाले यात्रियों को एक कागज के थैले में चादर, कंबल जैसे सामान दिए जाते हैं, लेकिन अब इस तरह की थैली में ही यात्रियों को यह सामान दिया जाएगा। साथ ही यात्रियों से अनुरोध किया जाएगा कि वह अपना कचरा इसी में डालें। दो अक्टूबर से इसे पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जाएगा। सभी 16 जोनों के अधिकारियों को यह छूट दी जा रही है कि वह कौन सी ट्रेनों में यह सुविधा शुरू करते हैं।
वरीयता उन्हीं ट्रेनों को दी जाएगी जो दिन में चला करती हैं। रात की ट्रेनों में कूड़ा फेंकने की संभावना कम रहती है। एसी1,2,3 के अलावा रिजर्व्ड स्लीपर क्लास में यह सुविधा रहेगी, लेकिन इसे जनरल क्लास में नहीं लागू किया जाएगा।