राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने लश्कर-ए-ताइबा के आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को आतंकवाद से जुड़े एक मामले में आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां निरोधक अधिनियम (टाडा) व अन्य आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी साक्ष्य पेश नहीं कर पाया, जिससे साबित हो कि टुंडा वर्ष 1994 में दर्ज इस मामले में लिप्त था। टुंडा उन 20 आतंकियों में शामिल है, जिसे मुंबई आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से सौंपने की मांग की थी।
टुंडा के खिलाफ 40 आतंकी घटनाओं में शामिल होने के मामले अभी विचाराधीन हैं। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा ने 73 वर्षीय टुंडा को टाडा के अलावा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप से बरी कर दिया।
उसके खिलाफ अभी कई मामले लंबित है। ऐसे में उसे जेल में ही रहना होगा। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 17 जनवरी 1994 को पांच आतंकियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 150 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ व छह खंजर बरामद किए थे।