प्याज की महंगाई से मिली राहत पर बारिश ने पानी फेर दिया है। एक बार फिर महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक प्याज के दाम बढ़ गए हैं।
दिल्ली में प्याज फिर से 70-80 रुपये किलो तक बिकने लगा है। प्याज की किल्लत को देखते हुए नेफेड ने पाकिस्तान, चीन, मिस्र और ईरान से तीन लाख टन प्याज मंगाने का टेंडर निकाल दिया है।
विदेशी प्याज महंगाई कम कर सकती है लेकिन स्वाद के मामले में यह देसी प्याज का मुकाबला नहीं कर सकती। पहले भी विदेश से आया प्याज सड़ने की नौबत आ चुकी है। नेफेड का यह कदम जमाखोरों को प्याज के दाम घटाने पर मजबूर कर सकता है।
गत 14 अगस्त को सरकार से प्याज के आयात की छूट मिलने के बाद सहकारी संस्था नेफेड ने इसके आयात की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नेफेड की ओर से जारी टेंडर के अनुसार, सप्लायरों से 27 अगस्त तक रेट के साथ प्रस्ताव मंगाए गए हैं।
इसके बाद सप्लायरों का चयन और प्याज की आपूर्ति होने में दो सप्ताह का समय और लग सकता है। नेफेड से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान से प्याज की पहली खेप 15 सितंबर से पहले पहुंचने की उम्मीद नहीं है।
आमतौर पर पाकिस्तान से बाघा बॉर्डर के जरिए प्याज भारत में पहुंचती है। कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि नियंत्रण रेखा पर तनाव और पाकिस्तान में भी प्याज की कमी को देखते हुए वहां से प्याज आने में समय लग सकता है। तब तक आम जनता को महंगी प्याज ही खानी पड़ेगी।
बृहस्पतिवार को दिल्ली की आजादपुर मंडी में प्याज के भाव 500 रुपये तक बढ़कर 4,500 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गए। महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में भी बारिश की वजह से आवक घटी और प्याज दोबारा 4,281 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया। जबकि सप्ताह की शुरुआत में वहां प्याज के भाव 3,200-3,500 रुपये के बीच आ गए थे।