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अब मुस्लिम देशों में भारत का डंका बजाएंगे मोदी!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खाड़ी क्षेत्र के मुस्लिम देशों के साथ भारत के रिश्तों की नई इबारत लिखने की तैयारी में हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जुड़े सूत्रों का कहना है कि साल के अंत तक प्रधानमंत्री इस्राइल के अलावा सऊदी अरब की यात्रा पर भी जा सकते हैं।
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साथ ही उच्च स्तर पर एक विचार यह भी चल रहा है कि इंडोनेशिया के बाद दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश भारत को मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी (आर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज) की सदस्यता की भी दावेदारी करनी चाहिए। भारत पहले भी इस संगठन में पर्यवेक्षक सदस्य के रूप में शामिल रह चुका है।

सूत्रों के मुताबिक सऊदी सरकार मोदी की मेहमाननवाजी के लिए खासी उत्सुक भी है। ऑस्ट्रेलिया में सऊदी शासक किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद की पीएम मोदी से अच्छी मुलाकात हुई थी। इसके बाद यमन संकट के दौरान दोनों की फोन पर सीधी बातचीत से भी निकटता बढ़ी है।
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सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार की विदेश नीति के शिल्पकार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कूटनीति का ताना बाना बुन रहे है। इसके लिए उन्होंने आईबी में अपने विश्वस्त रहे आसिफ इब्राहिम को नियुक्त कराकर उन्हें मुस्लिम देशों को साधने की ज़िम्मेदारी सौंपी है।
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क्या निकलेगा यात्रा से परिणाम?

ओआईसी की सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी के पक्ष में तर्क दिया जा रहा है कि अगर मुस्लिम देशों के इस संगठन में स्थायी सदस्यता मिलती है तो दुनिया के मुस्लिम देशों के बीच न सिर्फ पाकिस्तान को अलग-थलग किया जा सकेगा, बल्कि घरेलू राजनीति में भी बड़ा सकारात्मक संकेत जाएगा लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिंदुत्ववादी एजेंडे का दबाव सरकार को असमंजस में डाले हुए है।

पीएमओ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही पड़ोसी देशों से दोस्ती, सार्क की मजबूती और पश्चिम एशिया में भारत के हितों की सुरक्षा प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताओं में है। प्रधानमंत्री मोदी की इस्राइल यात्रा भारतीय कूटनीति में एक निर्णायक मोड़ होगी।

साथ ही मोदी इस्राइल के धुर विरोधी खाड़ी देशों को भी सकारात्मक संदेश देने के लिए सऊदी अरब की यात्रा का कार्ड खेल सकते हैं। अभी यह तय नहीं है कि यह यात्रा कब होगी लेकिन कूटनीतिक चैनल के जरिए सऊदी अरब से इस पर बातचीत हो रही है।
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