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अब ममता भी वंशवाद की राह पर

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अब दूसरे नेताओं की तरह तृणमूल कांग्रेस में वंशवाद कायम करने की दिशा में बढ़ रही हैं। इसके तहत ममता ने शुक्रवार को आयोजित पार्टी की बैठक में अपने भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी को संगठन से संबंधित कई अहम जिम्मेदारियां सौंप दी।
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ममता पिछले कुछ महीनों से अपने भतीजे को पार्टी में बतौर नंबर दो स्थापित करने का प्रयास कर रही हैं। इसी सप्ताह अभिषेक ने दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों पर पार्टी की ओर से आयोजित प्रदर्शन की अगुवाई भी की थी।

ममता ने पार्टी के दो युवा संगठनों का विलय करते हुए उसकी कमान अपने भतीजे को सौंप दी है। उन्होंने अब तक पार्टी में नंबर दो रहे महासचिव मुकुल राय के पर कतरते हुए उनका कद छोटा कर दिया है। यही नहीं, मुकुल के पुत्र और विधायक शुभ्रांशु राय से भी कई अधिकार ले लिए गए हैं।
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ममता हैं अभी बैकफुट पर

ममता ने पार्टी के सांगठनिक ढांचे में बदलाव करते हुए छात्र शाखा के अध्यक्ष शंकुदेव पांडा को भी पद से हटा दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि शारदा चिटफंड घोटाले से पार्टी के कुछ नेताओं के कथित संबंध और बर्दवान बम धमाके के मद्देनजर ही ममता ने संगठन में बदलवा का फैसला लिया है।

इन दोनों घटनाओं से पार्टी की साख पर बट्टा लगा है। तृणमूल के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से अहम इस बैठक से परिवहन मंत्री मदन मित्र, सांसद तापस पाल और कपड़ा मंत्री श्यामापद मुखर्जी नदारद रहे।

पाल के खिलाफ माकपा के कार्यकर्ताओं को धमकाने और उनके घरों की महिलाओं से रेप कराने की धमकी देने के आरोप हैं और इस मामले की जांच सीआईडी कर रही है। बाकी नेताओं के नाम शारदा घोटाले में सामने आए हैं।
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