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अब सामान्य नहीं, जानलेवा बुखार है मलेरिया

Tue, 25 Sep 2012 08:38 AM IST
सहारनपुर/चंद्रशेखर शर्मा
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‘अरे मलेरिया ही तो हुआ है, टाइफाइड थोड़े ही है जो परेशान हो रहा है।’ अब से करीब पांच-सात पहले तक मलेरिया के मरीज को यही बात कही जाती थी। तब इस रोग को काफी सामान्य समझा जाता था। अधिकतर डॉक्टर भी इसके मरीज को क्लोरोक्वीन और पेरासिटामोल की दो टेबलेट देकर ठीक कर देते थे। मगर अब न तो मलेरिया में वह बात है और न ही डॉक्टरों के इलाज में।
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इस मलेरिया ने इन दिनों यूपी के कई जिले में कहर बरपा रखा है। रोजाना सैकड़ों मरीज इसकी चपेट में आ रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीज डाक्टरों के पास जाते हैं तो जल्दी से ठीक नहीं हो रहे। सहारनपुर के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी कहते हैं कि पिछले कुछ सालों से मलेरिया का करेक्टर बदल गया है। मलेरिया में दी जाने वाली कुछ दवाओं का असर भी कम होने लगा है। इस रोग में दवाओं के प्रति एंडीबॉडीज डेवेलेप होने के कारण अब बीमारी का रूप बदल गया है और इसके इलाज का तरीका भी।

पिछले साल ही मलेरिया के प्रकोप के दौरान मलेरिया रिसर्च सेंटर की टीम के विशेषज्ञों ने भी संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर यही कहा था कि अब मलेरिया पहले जैसा नहीं रहा है और इसे हल्के में लेना अब खतरनाक साबित हो सकता है। संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल आफिसर डाक्टर ओपी सिंह मानते हैं कि अब मलेरिया को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इसके बदले करेक्टर के हिसाब से ही ट्रीटमेंट जरूरी है।
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ऐसा था पहले वाला मलेरिया
--शरीर में कंपन, सिरदर्द, बदन में ऐंठन के साथ धीरे धीरे तापमान बढ़ता था।
--मरीज को तब क्लोरोक्वीन एवं पेरासिटामोल टेबलेट देने से ही आराम मिल जाता था।
--ट्रीटमेंट के बाद तीन से पांच दिन में रोगी संतोषजनक स्थिति में आ जाता था।
--रोगी को पहले बीपी या प्लेटलेट्स की कमी की परेशानी इतनी नहीं होती थी।

ऐसा है अब का मलेरिया
--शरीर में कंपन, सिरदर्द, बदन में ऐंठन और तापमान बढ़ने के अलावा अब ब्लड प्रेशर और ब्लड प्लेटलेट्स घटने लगी है।
--गंभीर मलेरिया मरीजों पर अब क्लोरोक्वीन असर नहीं करती। उन्हें साथ में आरटीसुनेट, सल्फाडाक्सिन देना पड़ता है।
--रोग के ट्रीटमेंट के बाद भी मरीज को ठीक होने में एक सप्ताह से अधिक समय लग रहा है। दोबारा भी बुखार हो रहा है।
--मलेरिया में रोगी की प्रतिरोधक क्षमता तेजी से घट रही है और उसे बेहद कमजोरी महसूस हो रही है।

ये है मलेरिया
मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक परजीवी मादा मच्छर एनॉफिलीज के शरीर के अंदर पलता है। यह परजीवी मादा मच्छर एनॉफिलीज के काटने से फैलता है। जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तब रोग का परजीवी रक्तप्रवाह के जरिये यकृत में पहुंचकर अपनी सख्या को बढ़ाने लगता है। यह स्थिति लाल रक्त कोशिकाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। चूंकि मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में पाये जाते हैं, इसलिए ये मलेरिया से सक्रमित व्यक्ति द्वारा ब्लड ट्रासफ्यूजन के जरिये दूसरे व्यक्ति में भी संप्रेषित हो सकते हैं। इसके अलावा अंग प्रत्यारोपण और एक ही सीरिंज का दो व्यक्तियों में इस्तेमाल करने से भी यह रोग फैल सकता है।
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मलेरिया के लक्षण
शरीर में कंपन, सिरदर्द, बदनदर्द, हड्डियों में अंकड़न, उल्टी आना और लगातार बुखार रहना

बचाव के तरीके
--मच्छरों से दूर रहने के सभी साधन अपनाएं
--घर के आसपास की गंदगी को दूर रखें
--ठंड के साथ बुखार तेज हो तो डाक्टर को दिखाएं
--चिकित्सक के निर्देश पर एंटी मलेरियल दवाएं लें
--ब्लड प्रेशर, ब्लड प्लेटलेट्स पर भी रखें नजर
--ज्यादा समय तक बुखार रहें तो एडमिट होने में देर न करें

बुखार भगाने के कुछ घरेलू नुस्खे
--नमक, काली मिर्च, नीबू में भरकर गर्म करके चूसने से बुखार की गर्मी दूर हो जाती है। यह दो बार रोज चूसे।
--दो नीबू का रस नीबू के छिलको सहित 500 ग्राम पानी में मिलाकर मिट्टी की या स्टील के भगोने में रात को उबालकर रखें, सुबह इसे पी लें।
--दो नारंगी के छिलकों को दो कप पानी में उबालें। आधा पानी रह जाने पर छानकर गर्म करके पीएं।
--ज्वर में सेब खाने से ज्वर जल्दी ही ठीक हो जाता है।
--मलेरिया में अमरूद लाभदायक है। मलेरिया में ज्वर आने के पहले सेब खाने से ज्वर आने के समय, ज्वर नहीं आता।
--एक चम्मच जीरा पीस लें। जीरे से तीन गुना गुड़ इसमें मिलाकर इसकी तीन गोलियां बना लें और एक-एक गोली खाएं।
--धनिया और सौंठ दोनों पिसे और समान मात्रा में मिलाकर नित्य तीन बार पानी से फंकी लें।
--छाछ पीने से हर चौथे दिन आने वाला मलेरिया ठीक होता है।
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