सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह राजनीतिक नेताओं को भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले भाषण देने से नहीं रोक सकता। इस सिलसिले में दायर एक जनहित याचिका पर फैसला करते हुए उसने कहा कि ऐसा करके लोगों को मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में अड़ंगा नहीं डाल सकता।
जस्टिस आर एम लोढ़ा की बेंच ने राजनीतिक नेताओं के भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले भाषणों को रोकने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम लोगों के मौलिक अधिकारों में कटौती नहीं कर सकते। यह संविधान की ओर दिया गया बेशकीमती अधिकार है। भारत एक परिपक्व लोकतंत्र हैं। लिहाजा यहां लोगों को फैसला लेने दें।