गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भले भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित कर दिया गया हो, लेकिन उनकी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। उन्हें लेकर नया बवाल खड़ा हो गया है।
मोदी और 2002 में गुजरात में हुए दंगों में उनकी कथित भूमिका को लेकर शिकागो में काउंसल फॉर ए पार्लियामेंट ऑफ द वर्ल्ड रिलीजियस (सीपीडब्ल्यूआर) में विवाद पैदा हो गया है।
उसने स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती पर होने वाले समारोह से नाम वापस ले लिया है।
सीपीडब्ल्यूआर का गठन 1893 में हुआ था और इसी संस्था ने वह कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी, जिसमें विवेकानंद ने शिकागो को संबोधित किया था।
विवेकानंद जयंती से जुड़ा समारोह 27-28 सितंबर को होना है। यह समरोह वर्ल्ड विदआउट बॉर्डर्स के बैनर तले किया जा रहा है और वीएचपी, कई मंदिर इसके स्पॉन्सर में शामिल हैं।
सीपीडब्ल्यूआर के बोर्ड की वाइस चेयर डॉ. मैरी नेल्सन ने कहा, "काउंसल 120 साल पुरानी संस्था है, जो शांति के लिए काम करती है। इसका मिशन स्वामी विवेकानंद की तरह शांति और सभी धर्मों के बीच सौहार्द्र कायम करना है। हम स्वामी विवेकानंद और उनकी विरासत का सम्मान करते हैं।"
उन्होंने कहा, "हमें यह पहले नहीं बताया गया था जिस समारोह के प्रायोजकों में हम शामिल हैं, उसके स्पॉन्सर में ऐसे भी लोग शामिल हैं, जो विवादास्पद राजनीति को बढ़ावा देते हैं।"
मोदी और वीएचपी पर 2002 के सांप्रदायिक दंगों का आरोप लगाते हुए 'कोलिशन अगेंस्ट जिनोसाइड' नामक संस्था ने सीपीडब्ल्यूआर को इस समारोह से नाम वापस लेने के लिए राजी करने में अहम भूमिका निभाई।