झारखंड में झामुमो के साथ गठबंधन सरकार और आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के बाद अब कांग्रेस 'ऑपरेशन बिहार' को अंजाम देने में जुट गई है।
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मांग को पूरा करने की तैयारी शुरु हो गई है।
अपना दबाव बढ़ाने केलिए नीतीश कुमार भी बुधवार को दिल्ली आ रहे हैं। वह वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से भी मुलाकात करेंगे। इसमें बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की भूमिका तैयार होगी।
नीतीश की मांग को देखते पिछड़े राज्यों के मानक और आधार की समीक्षा करके उन्हें फिर परिभाषित करने के लिए गठित की गई रघुराम राजन कमेटी की रिपोर्ट लगभग तैयार हो चुकी है।
बताया जाता है कि दस अगस्त की बैठक में रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर 15 अगस्त तक इसे सरकार को सौंपा जा सकता है। इसके बाद केंद्र सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का फैसला कर सकती है।
यह जानकारी देने वाले सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व अब जनता दल(यू) को साधने में जुट गया है। इसलिए केंद्र सरकार बिहार पर मेहरबान है।
राज्य की सड़कों के लिए केंद्र करीब चार हजार करोड़ रुपए की राशि पहले ही मंजूर हो चुकी है। इसके अलावा बिहार को अतिरिक्त बिजली देने की मांग भी मानी जा चुकी है।
नीतीश इस स्थिति का फायदा उठाकर बिहार के लिए ज्यादा से ज्यादा रियायतें और योजनाएं लेने में जुटे हैं।
हाल ही में राष्ट्रपति भवन में जद(यू) सांसद और पूर्व राजस्व सचिव एन.के.सिंह की बिहार पर लिखी किताब के विमोचन के मौके पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि पिछड़े राज्यों के मानदंड पर पुनर्विचार होना चाहिए।
जद(यू) नेता इसे बिहार के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। जद(यू) प्रवक्ता सांसद के.सी.त्यागी कहते हैं कि बिहार को विशेष राज्य दर्जे की हमारी मांग को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। यह बिहार के विकास की आवश्यकता है। इससे नए बिहार का निर्माण होगा और देश को भी ताकत मिलेगी।
जद(यू) के शक्तिपुंज और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा से अलग होकर जो दांव खेला है, बिहार में उसकी कामयाबी जद(यू) के पक्ष में मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण पर निर्भर है।
नीतीश का मानना है कि यह तभी मुमकिन है। इसके लिए बिहार के लिए रियायतें और कांग्रेस से दोस्ती जरूरी है।
इसलिए नीतीश कुमार यूपीए सरकार और कांग्रेस के भीतर अपने मित्रों के जरिए यह दबाव बनाए हुए हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा जल्दी से जल्दी घोषित किया जाए। तब बिहार के हित के नाम पर नीतीश कांग्रेस के साथ दोस्ती का रास्ता निकाल सकते हैं।
हालाकि गैर कांग्रेसवाद की राजनीति पले बढ़े जद(यू) के कुछ बड़े नेता गैर कांग्रेस और गैर भाजपा राजनीति की अगुआई करने के पक्ष में हैं।