भाजपा अपने पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को मौजूदा पांच राज्यों के चुनाव के बाद अगले एक-दो माह तक रैलियों से ‘विश्राम’ देगी।
इस दौरान भाजपा लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन में जुटेगी और आगामी चुनावी महासमर के लिए अपनी तैयारी करेगी। पार्टी की इस रणनीति के तहत फरवरी से मोदी फिर से रैलियों में दहाड़ते नजर आएंगे।
इस दौरान मोदी की गिनी-चुनी रैलियां ही होंगी। पांच राज्यों के चुनाव से लेकर आगामी लोकसभा चुनाव तक भाजपा का लगभग सौ बड़ी रैलियां करने का लक्ष्य है। इनमें से आधी रैलियां अकेले मोदी की होनी हैं।
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विधानसभा चुनाव की रैलियों को छोड़कर मोदी अब तक देश के विभिन्न इलाकों में लगभग एक दर्जन बड़ी रैलियां कर चुके हैं। इन रैलियों में मोदी को मिले समर्थन से भाजपा बेहद उत्साहित है, लेकिन पार्टी मोदी की लोकप्रियता कायम रखने के लिए चिंतित भी है।
पार्टी को आशंका है कि ज्यादा रैलियां करने से कहीं लोकसभा चुनाव आते-आते उनका जादू फीका न पड़ जाए। इसलिए तय किया गया है कि मोदी का जादू कायम रखने के उन्हें कुछ दिनों तक रैलियों से मुक्त रखा जाए।
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इसके अलावा अब पांच से 20 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र भी है, इससे पार्टी के सांसद व बड़े नेता संसद में व्यस्त हो जाएंगे। आठ दिसंबर को पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे भी आएंगे।
भाजपा को चार राज्यों से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। पार्टी मान रही है कि दिसंबर व जनवरी नई सरकार के गठन व कामकाज संभालने में ही बीत जाएगा। इसलिए फरवरी से ही अब मोदी की चुनावी रैलियां फिर से जोर पकड़ेंगी।
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